अयोध्या पर मध्यस्थता की विफलता के मायने

सवाल यह है कि मध्यस्थता कमेटी मामले का हल निकालने में कामयाब क्यों नहीं हो सकी? क्या दोनों ही पक्ष कोर्ट के इतर की गई कोशिशों में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे? क्या सुप्रीम कोर्ट जल्द इस मामले पर फैसला देगा? क्या आने वाले दिनों में इस विवाद का हमेशा-हमेशा के लिए अंत हो जाएगा? क्या फैसला खिलाफ आने के बाद संबंधित पक्ष मामले को दोबारा तूल नहीं देगा?

Sanjay

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर कोर्ट के बाहर हल निकालने की अंतिम कोशिश भी नाकाम रही। तीन सदस्यीय कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि विवाद का हल मध्यस्थता से निकालने में कामयाबी नहीं मिली। रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने मामले की नियमित सुनवाई का फैसला सुना दिया है। अयोध्या विवाद पर 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई की जाएगी। सवाल यह है कि मध्यस्थता कमेटी मामले का हल निकालने में कामयाब क्यों नहीं हो सकी? क्या दोनों ही पक्ष कोर्ट के इतर की गई कोशिशों में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे? क्या सुप्रीम कोर्ट जल्द इस मामले पर फैसला देगा? क्या आने वाले दिनों में इस विवाद का हमेशा-हमेशा के लिए अंत हो जाएगा? क्या फैसला खिलाफ आने के बाद संबंधित पक्ष मामले को दोबारा तूल नहीं देगा? क्या सियासी दल इस मामले पर अपनी-अपनी रोटियां नहीं सेकेंगे?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। इसमें एक हिस्सा रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। ये अपीलें 2010 से लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस का हल आपसी बातचीत से निकालने की कोशिश की। कोर्ट ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता कमेटी गठित की थी। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल थे। मध्यस्थता की यह कोशिश 155 दिनों तक चली, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। दरअसल, मध्यस्थता कमेटी के गठन के साथ ही इसको लेकर सवाल उठाए गए। अधिकांश पक्षों ने इस मामले को हल करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। यह दीगर है कि इस दौरान किसी पक्ष ने बयानबाजी नहीं की लेकिन कमेटी के गठन के कुछ दिन बाद ही तस्वीर साफ हो चुकी थी कि यह कोशिश अपने अंजाम तक नहीं पहुंचेगी और हुआ भी वही। हालांकि कमेटी ने आश्वासन दिया था कि इसके सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं, लिहाजा कोर्ट ने कमेटी की अवधि बढ़ा दी थी। अब जब कमेटी ने हाथ खड़े कर दिए तो सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है। हकीकत यह है कि सभी पक्ष कोर्ट से इसका हल चाहते हैं ताकि बाद में विवाद न बढ़े और इसका स्थायी हल निकल सके। रोजाना की सुनवाई से अयोध्या केस तेजी से समाधान की ओर आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे। ऐसी स्थिति में उनके रिटायर होने से पहले इस मामले में फैसला आने की उम्मीद है।

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