लोगों को घायल कर रहा चाइनीज मांझा, रोक लगाने में पुलिस नाकाम

  • धड़ल्ले से बिक रहा मांझा, हादसों के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
  • एनजीटी ने दो साल पहले लगाई थी उत्पादन और बिक्री पर रोक
  • राजधानी में राह चलते लोग आ रहे चपेट में, अभियान भी रहे बेअसर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रतिबंध के बावजूद राजधानी में चाइनीज मांझे की बिक्री धड़ल्ले हो रही है। मांझे की चपेट में आकर कई लोग घायल हो चुके हैं लेकिन पुलिस इसकी बिक्री रोकने में नाकाम साबित हो रही है। हैरानी की बात यह है कि एनजीटी के आदेश के बावजूद स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। वहीं इसके खिलाफ चले अभियान भी बेअसर दिख रहे हैं।
चाइनीज मांझे की चपेट में आने से आए दिन कोई न कोई घायल होता रहता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए कई आदेश पारित हुए और कई अभियान चले, लेकिन इसके बाद भी चाइनीज मांझा आसानी से बाजार में उपलब्ध है। जुलाई 2017 में एनजीटी द्वारा जारी एक आदेश के बाद देश में चाइनीज मांझे के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई गई है लेकिन इसके बाद भी पुलिस इस पर नियंत्रण नहीं लगा पा रही है। गौरतलब है कि बाजार में अलग-अलग ब्रांड के चाइनीज मांझे उपलब्ध हैं। इनमें उनकी गुणवत्ता के अनुसार रेट तय किए गए हैं, जिनमें छोटी चरखी 300 रुपये व छह रील का मांझा 650 रुपये का है। कुछ मांझा वजन के हिसाब से भी बिक रहे हैं। इनमें हल्के मांझे के दाम कम हैं जबकि भारी मांझा महंगा है, जितना भारी मांझा होगा उतनी अच्छी उसकी गुणवत्ता बताई जाती है। चाइनीज मांझे की चपेट में आने से कई लोगों गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। वहीं, कई पक्षी भी इसमें फंसकर घायल होकर दम तोड़ चुके हैं। नायलॉन और सिंथेटिक से मिलकर बनाया गया मांझा आसानी से टूटता नहीं है। कई वर्षों से बरेली का मांझा पतंग उड़ाने के शौकीन लोगों के दिलों पर राज करता था। अलग-अलग रंगों में डोर से बने मांझे पर बारीक कांच लगा कर तैयार किया जाता है। अब इस मांझे को चाइनीज मांझे ने करीब-करीब खत्म कर दिया है।

रक्षाबंधन पर बढ़ जाती है मांग
पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद, सआदतगंज, रकाबगंज, बालागंज और चौक आदि इलाकों में चाइनीज मांझे की धड़ल्ले से बिक्री की जा रही है। रक्षाबंधन, दीपावली और ईद में मांझे की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है।

करंट का खतरा
चाइनीज मांझा प्लास्टिक से बना होता है। इसके साथ-साथ इस पर लोहे का बुरादा लगा होता, जो अगर किसी बिजली के तार से छू जाए तो करंट लगने से मौत होने की आशंका रहती है।

हो चुके हैं कई हादसे

ड्ड मई 2019
चौपटिया निवासी रितेश वर्मा बाइक से घर जाते वक्त चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। अगर वे वक्त पर अस्पताल न पहुंचते तो उनकी जान बचानी मुश्किल थी।
ड्डअक्टूबर 2018
गोमतीनगर के लोहिया पार्क के पास ज्योति नाम की युवती ऑफिस के लिए जा रही थी। तभी मांझे की चपेट में आकर उसका गला कट गया। किसी तरह उसकी जान बची।
ड्डअप्रैल 2018
गोमतीनगर इलाके में चाइनीज मांझे की चपेट में आने से बाइक सवार उपेंद्र यादव की गर्दन कट गई थी। उपेंद्र फन मॉल के सामने से गुजर रहा था, जब उसकी गर्दन में मांझा आकर फंस गया।
ड्डअप्रैल 2017
हुसैनगंज निवासी विभांशु (23) बाइक से अलीगंज से आईटी चौराहे की ओर जा रहे थे। इस दौरान चौराहे से चंद कदम की दूरी पर विभांशु की गर्दन के दाएं हिस्से में करीब सात सेमी लंबा कट लग गया था।

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