पानी की बर्बादी और अंधाधुंध दोहन से गिरा भूमिगत जल स्तर, खोखली हो रही जमीन

  • रोजाना 7500 लाख लीटर पानी निकाला जा रहा भूगर्भ से
  • ट्यूबेल की संख्या में तेजी से हो रहा इजाफा, धंस रही जमीन
  • पानी की किल्लत झेल रहे शहरवासी, अनियोजित कॉलोनी के निवासी भी परेशान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शहर में पेयजल की किल्लत भले ही दूर न हो पा रही हो लेकिन इन सबके बीच भूगर्भ जल का स्तर तेजी से घटने लगा है। पानी की बर्बादी और आबादी के दबाव के कारण धरती से जल का दोहन पिछले सालों की अपेक्षा तेजी से बढ़ा है। वहीं सरकारी बिल्डिंग से लेकर निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होने से स्थितियां बेकाबू हो गई हैं। इससे भविष्य में पानी की किल्लत से शहरवासी दो-चार होंगे।
शहर में करीब 30 लाख से ज्यादा लोग निवास करते हैं। इनको पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है। ज्यादातर अनियोजित इलाके ऐसे हैं जहां जलकल विभाग द्वारा पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दिया जा रहा है जबकि शहर में रोजाना 7500 लाख लीटर पानी का दोहन हो रहा है। पिछले साल शहर में जलापूर्ति के लिए लगाए गए ट्यूबवेलों की संख्या 10 गुना तक बढ़ गई है। भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब 7500 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन के अंदर से निकाला जा रहा है। अंधाधुंध दोहन की वजह से लखनऊ में भूजल निचले स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञ बताते हैं कि शहर के प्रमुख इलाकों में इसकी वजह से जमीन धंसने की आशंका पैदा हो गई है। जल संस्थान लखनऊ से मिले आंकड़ों के मुताबिक 1985 में लखनऊ की मांग पूरी करने के लिए केवल 70 ट्यूबवेल लगाए गए थे लेकिन अब इनकी संख्या बढक़र 672 हो गई है। इसके बाद भी जल संस्थान पानी संकट झेल रहा है। इसकी वजह से 16 घंटे तक होने वाली पानी की आपूर्ति कई इलाकों में पांच घंटे तक रिकॉर्ड की गई। जाहिर है, भविष्य में यहां जल संकट गहराएगा।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी नदारद
लखनऊ। (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क) शहर में लगतार घट रहे भूजल स्तर को देखते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बड़ी और व्यावसायिक इमारतों, स्कूलों और हॉस्पिटल आदि में अनिवार्य किया है। गर्मी के दिनों में शहर में पानी की किल्लत बढ़ जाती है। ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम घरों में होने से इस परेशानी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता था। इसी मंशा से लखनऊ नगर निगम ने निजी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने वालों को हाउस टैक्स में दो प्रतिशत की छूट देने का प्रवाधान रखा गया था लेकिन निजी भवन में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न होने के कारण उन्हें हाउस टैक्स में छूट नही मिल रही है। ऐसे में लगातार पानी का दोहन होने से धरती खोखली होती जा रही है।

रोजाना 12,500 लाख लीटर पानी जरूरत

शहर की 30 लाख की आबादी के लिए अभी 12,500 लाख लीटर पानी की रोजाना जरूरत है। 2025 तक यह मांग 25000 लाख लीटर रोजाना होगी। 2018 में गोमती नदी का जलस्तर न्यूनतम 346.7 फुट रिकॉर्ड हुआ। ऐसे में यह तय है कि भूगर्भ जल का दोहन आने वाले दिनों में बढ़ जाएगा। यह खतरनाक संकेत है जो आने वाले समय में शहरवासियों के लिए समस्या बनेगा।

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