बच्चों को भी एहसास करायें अपने आंसू आप भी इंसान हैं सुपरमैन नहीं

च्चे अपने पैरेंट्स को देखकर ही सबकुछ देखते और समझते हैं। उनके लिए वह किसी सुपर हीरो से कम नहीं होते। यानी कि वह हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं। बच्चों की हर डिमांड पूरी करते हैं। उन्हें कभी भी कोई भी प्रॉब्लम नहीं होती। तो पैरेंट्स भी बच्चों की इसी कल्पना को जीते हैं। वह पूरी कोशिश करते हैं कि कभी भी किसी भी स्थिति में वह अपने बच्चे के सामने परेशान न हों। कभी अगर उन्हें तकलीफ हो भी जाए तो भी वह बच्चों के सामने आंसू नहीं बहाते। बल्कि किसी दूसरे कमरे में या फिर बच्चों से छिपकर रोते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए। बच्चों को भी इस बात का एहसास कराया जाना जरूरी होता है कि आप भी इंसान हैं कोई सुपरमैन नहीं।

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