मानव तस्करी, कानून और पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि कड़े कानूनों के बावजूद तस्करों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या कन्या भ्रूण हत्या, अशिक्षा और बेरोजगारी मानव तस्करी के लिए जिम्मेदार हैं? पुलिस इस जघन्य अपराध पर नियंत्रण क्यों नहीं लगा पा रही है? क्या उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी के सिंडिकेट चल रहे हैं? तस्करों को संरक्षण कहां से मिल रहा है? क्या सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है?

Sanjay Sharma

पिछले दिनों लखनऊ में मानव तस्करी के एक मामले का खुलासा हुआ। यहां एक भिखारी पांच वर्ष में तीस लड़कियों को बेच चुका है। यह खुलासा उन दो किशोरियों ने किया जो भिखारी के चंगुल से भागने के दौरान पुलिस के हत्थे चढ़ गई थीं। भिखारी इन लड़कियों से देह व्यापार कराता था। जनवरी में पुलिस ने बागपत से छह किशोरों को बरामद किया था। इन किशोरों को मध्य प्रदेश से यहां लाया गया था। वहीं पिछले साल शाहजहांपुर से राज्य के विभिन्न जिलों से बहला-फुसलाकर लाई गई तीन लड़कियों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया। ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि प्रदेश में मानव तस्करों की जड़ें गहरे तक जम गई हैं। सवाल यह है कि कड़े कानूनों के बावजूद तस्करों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या कन्या भ्रूण हत्या, अशिक्षा और बेरोजगारी मानव तस्करी के लिए जिम्मेदार हैं? पुलिस इस जघन्य अपराध पर नियंत्रण क्यों नहीं लगा पा रही है? क्या उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी के सिंडिकेट चल रहे हैं? तस्करों को संरक्षण कहां से मिल रहा है? क्या सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार और लापरवाही के चलते स्थितियां बेकाबू होती जा रही हैं?
पूरी दुनिया में मानव तस्करी का जाल फैलता जा रहा है। संयुक्त राष्टï्र के मुताबिक किसी व्यक्तिको बल,धोखे या हिंसा से बंधक बना कर रखना मानव तस्करी है। इसमें पीडि़त से देह व्यापार व घरेलू काम उसकी इच्छा के विरुद्ध कराये जाते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक दुनिया में 80 फीसदी से ज्यादा मानव तस्करी यौन शोषण व बीस फीसदी बंधुआ मजदूरी के लिए की जाती है। मानव तस्करी का सबसे बड़ा कारण गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी है। लड़कियों और महिलाओं की तस्करी न सिर्फ देह व्यापार के लिए की जाती है, बल्कि उन्हें उन क्षेत्रों में भी बेचा जाता है, जहां कन्या भ्रूण हत्या के कारण लड़कियों का लिंग अनुपात लडक़ों के मुकाबले बहुत कम है। यूपी में मानव तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यहां तस्करों के गिरोह सक्रिय हैं। ये गिरोह एमपी, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिमी बंगाल से नाबालिगों को बहला-फुसलाकर यहां लाते हैं और बाद में उनको बेच देते हैं। अधिकांश लड़कियों को देहव्यापार में धकेल दिया जाता है जबकि किशोरों से खेतों से लेकर दुकानों तक में बंधुआ मजदूरी कराई जाती है। बच्चों से भीख मंगवाई जाती है। सरकार को चाहिए कि वह मानव तस्करों के सिंडिकेट को खत्म करने के लिए सटीक रणनीति बनाए व पुलिस को इसके खिलाफ लगातार अभियान चलाने के निर्देश दे। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या पर कड़ाई से लगाम लगाए। वहीं गरीबी को भी दूर करना होगा।

 

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