Control Crime by “UPCOP” App थानों के चक्कर से मिल रही निजात

  • छह माह में दो लाख लोगों ने उठाया फायदा, लोग एप पर दर्ज करा रहे शिकायत
  • देश में केवल यूपी पुलिस के पास है यह हाईटेक व्यवस्था
  • एडीजी आशुतोष पांडेय की मेहनत लाई रंग, तीन संस्थाओं ने किया सम्मानित
  • पुलिस अधिकारियों के फोन नंबर से लेकर जांच रिपोर्ट तक उपलब्ध

गणेश जी वर्मा

लखनऊ। अगर आपकी बाइक चोरी हो गई हो, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट चाहिए, रास्ते में आपको लूट लिया गया हो या कोई ऐसी घटना घटित हो गई हो जिससे कारण आपको पुलिस थाने जाना पड़े तो घबराइये नहीं। यूपीकॉप एप आपकी सहायता के लिए हर वक्त तैयार है। डीजीपी ओपी सिंह के निर्देशन में एडीजी आशुतोष पांडेय ने यूपीकॉप एप बनाया है। यह एप एक जनवरी 2019 से प्रदेश में लागू है। इस एप से अब पुलिस विभाग का चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी। सभी समस्याओं का समाधान इस एप के जरिये हो सकता है। इस एप में सिर्फ नामजद मुकदमा नहीं दर्ज होगा।
एडीजी आशुतोष पांडेय ने बताया कि इस एप के माध्यम से मात्र छह माह में दो लाख लोगों ने इसका फायदा उठाया है जबकि 1,25,000 लोगों को थाने नहीं जाना पड़ा। यह एप लोगों को तमाम तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराता है। मसलन यदि आप पुरानी बाइक खरीदना चाहते हैं और आपको उस बाइक के बारे में पता करना है तो आप एप पर जाइए। बाइक का नंबर डालिए और आपको सारी जानकारी मिल जाएगी। इसके साथ ही यह भी पता चलेगा कि बाइक चोरी की है या नहीं। वहीं यदि आप कहीं सफर कर रहे हंै और आपके साथ लूट या कोई अन्य घटना घटित हो रही है और आपको पता नहीं है कि यह घटना किस थाना क्षेत्र में है तो एप आपको थाना क्षेत्र के साथ थाने का रास्ता भी बताएगा। इस एप में पुलिस विभाग के अधिकारियों का नंबर भी मौजूद हैं। जिसके माध्यम से थानाध्यक्ष, सीओ, एसपी, डीआईजी, आईजी, एडीजी, डीजीपी तक से संपर्क किया जा सकता है। एप के माध्यम से प्रदेश के किस थाने में कितने अपराधी गिरफ्तार किए गए इसकी भी जानकारी ली जा सकती है। किसी कर्मचारी या किरायेदार का सत्यापन कराना है तो थाने जाने की जरूरत नहीं। एप पर जानकारी दीजिए। पुलिस स्वयं घर जाएगी और उस व्यक्ति के बारे में जो भी आपराधिक इतिहास होगा उससे आपको अवगत करा देगी।

अज्ञात शवों व लापता लोगों की सूचना
अक्सर कई लोगों की इस तरह से मौत हो जाती है कि उनके परिजनों को पता नहीं चल पाता है। ऐसे में प्रदेश में कितने अज्ञात शव पाये गए और उनका हुलिया कैसा था? शरीर पर चोट के निशान थे या नहीं? शव पर किस तरह का कपड़ा मौजूद था? ये सब जानकारी मौजूद है। एप में लापता लोगों की जानकारी भी मौजूद है। इसके साथ ही यदि आपके घर से कोई लापता हुआ है तो आपको थाने जाने की जरूरत नहीं है आप एप पर ही अपनी ई-एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।

मिल चुका पुरस्कार
इस एप की खूबियों को देखने के बाद एमएचए ने जहां इसे सम्मानित किया वहीं इसे स्कॉर्च अवार्ड भी मिल चुका है। इसके साथ ही एनसीआरबी रनिंग ट्रॉफी 2019 से भी सम्मानित किया गया है।

दो दर्जन से ज्यादा लोगों को वापस मिले रुपये
बैंक से रुपये कट जाने या साइबर क्राइम होने पर भी आप एप का सहारा ले सकते हैं। अब तक इस एप के माध्यम से दो दर्जन से अधिक लोगों को रुपये वापस कराए गए हैं। इसमें गाजियाबाद की इंद्रजीत कौर, गौरव अग्रवाल, कल्पा दुबे, लखनऊ के प्रखर शुक्ला, अभिषेक वाजपेई, राकेश कुमार सिंह, मुजफ्फरनगर के मो. अफजाल अंसारी, गौतमबुद्घनगर के अमित कुमार चौहान, निलांजन, जया घोष, अनमोल जैन सहित अन्य लोग शामिल हैं।

ऐसे डाउनलोड करें एप
एप डाउनलोड करना बहुत ही सरल है। प्ले स्टोर पर जाकर यूपीकॉप सर्च करें। इसे इंस्टॉल करने के बाद अपना नाम व पता भरे। इसके बाद यह एप चालू हो जाएगा। अंग्रेजी व हिन्दी भाषा में भी यह एप उपलब्ध है।
एप बताता है आपकी लोकेशन
अधिकतर लोगों को यह पता नहीं होता है कि वह किसी जगह से सूचना दे रहे हैं वहां कौन सा थाना है ऐसे में एप अक्षांक्ष-देशांतर के माध्यम से आपके जगह का लोकेशन ई- थाने पर भेज देता है, जिससे आपका सहयोग होता है।
ये भी सुविधाएं
दिव्यांग, वरिष्ठï नागरिकों, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, धरना-प्रदर्शन की अनुमति, साइबर क्राइम, इनामी अपराधी, अत्यधिक दुर्घटना वाले स्थान सहित और भी सुविधाएं मौजूद है इस एप में। जिसके वजह से आप किसी घटना का शिकार होने से बच सकते हैं।

लोगों को सुविधा देने के लिए यूपी पुलिस कटिबद्घ है। लोगों की समस्याओं का समाधान करना यूपीकॉप एप की प्राथमिकता है। हमें खुशी है कि इसके माध्यम से लोगों का समय बच रहा है। लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। हर कोई इस एप की तारीफ कर रहा है। देश में ऐसी व्यवस्था सिर्फ यूपी पुलिस के पास है।
-आशुतोष पांडेय
एडीजी, टेक्निकल सर्विस

दर्ज हुए मुकदमे
चोरी – 540
बाइक चोरी – 85
मोबाइल चोरी – 111
साइबर क्राइम – 502
लापता बच्चे – 4
लूट – 1331
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  1. 2019 हृष्टक्रक्च रनिंग ट्रॉफी से भी किया गया है सम्मानित  
  2. 02 लाख लोगों ने इसका फायदा उठाया है 6 माह में 
  3. 01 25,000 लोगों को नहीं जाना पड़ा थाने
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