राजधानी में साइबर जालसाजों का आतंक ऑनलाइन विज्ञापन के जरिए कर रहे हैं ठगी

  • हर माह एक दर्जन से ज्यादा हो रही घटनाएं
  • एडवांस रुपया लेने के बाद बंद कर लेते हैं फोन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में साइबर जालसाजों का आतंक बढ़ता जा रहा है। ये जालसाज ऑनलाइन विज्ञापन देकर लोगों से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। जब तक व्यक्ति को ठगे जाने का एहसास होता है तब तक ये मोबाइल बंद कर लेते हैं। वहीं ऐसे जालसाजों पर शिकंजा कसने में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।
ओएलएक्स पर साइबर जालसाजों की नजर है। ठगी की घटनाओं में सामने आया है कि साइबर जालसाज एक ही गाड़ी का अलग-अलग विज्ञापन देकर एक ही समय में कई लोगों को निशाना बना रहे हैं। गाड़ी भेजने का दावा करके पूरी रकम लेने के बाद जालसाज गायब हो जाते हैं। चूंकि मोबाइल नंबर भी फर्जी आईडी पर लिया गया होता है इसलिए जालसाजों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि जालसाजों द्वारा इस्तेमाल किए गए ज्यादातर नंबर छत्तीसगढ़ के होते हैं। ओएलएक्स के माध्यम से लखनऊ में ही चार महीने में 50 से अधिक लोगों से ठगी की जा चुकी है। 40 शिकायतों की छानबीन साइबर क्राइम सेल कर रही है। सेल के नोडल अधिकारी अभय कुमार मिश्रा के मुताबिक ओएलएक्स पर कई तरह से ठगी की जा रही है। गाड़ी बेचने के नाम पर जालसाज एडवांस लेकर गायब हो जाते हैं। इसके अलावा गाड़ी या कोई अन्य सामान खरीदने के नाम पर जालसाज पीडि़तों के पेटीएम या बैंक खातों की जानकारी हासिल कर रुपये उड़ा देते हैं।

अलग-अलग नाम से विज्ञापन

बाजारखाला के बिल्लौचपुरा निवासी वसीम अकरम ने ओएलएक्स पर आई-20 कार का विज्ञापन देखकर दिए गए नंबर पर फोन किया। कॉल रिसीव करने वाले सैफ सिद्दीकी ने सैन्यकर्मी के रूप में परिचय दिया। 3.60 लाख में सौदा पक्का होने पर आरोपित ने अपनी आईडी, गाड़ी के पेपर और गाड़ी की फोटो वॉट्सएप पर भेजी। इसके साथ ही ट्रासंपोर्ट के जरिए कार भेजने का आश्वासन देकर 7100 रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद बातों में फंसाकर 2.81 लाख और वसूल लिए। इसके बावजूद कार नहीं पहुंची और जालसाज का फोन भी बंद हो गया। इसके कुछ दिन बाद फिर उसी कार का विज्ञापन दिया गया। पीडि़त के अनुसार आरोपित ने अलग-अलग नाम से विज्ञापन दिया था।

सैन्यकर्मी बता ठगा

चिनहट निवासी तुषार वर्मा और हरिओम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। पीडि़त के अनुसार उन्हें कोचिंग आने-जाने में दिक्कत होती थी। लिहाजा उन्होंने ओएलएक्स पर एक्टिवा का विज्ञापन देख दिए गए नंबर पर फोन किया। कॉल रिसीव करने वाले ने खुद को सैन्यकर्मी और अपनी तैनाती आगरा में बताई। 20 हजार में सौदा तय हुआ। इसके बाद जालसाजों ने बातों में फंसाकर अलग-अलग खातों में रुपये जमा करवा लिए। रकम देने के काफी समय बाद भी गाड़ी न मिलने पर पीडि़त ने फोन किया, लेकिन नहीं उठा।

ऑनलाइन शॉपिंग में इनका रखें ध्यान

द्य क्रेडिट या डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग की डिटेल जीमेल या गूगल ड्राइव से दूर रखें
द्य के्रडिट या डेबिट कार्ड से सीवीवी नंबर मिटा दें
द्य ई-मेल या एसएमएस से आए लिंक के जरिये बैंक की वेबसाइट पर क्लिक न करें।
द्य आधिकारिक वेबसाइट से ही बैंकिंग या फाइनैंशल एप डाउनलोड करें

 

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