साइबरबुलिंग नौजवानों के लिए हानिकारक: अनन्या

इबरबुलिंग के खिलाफ ‘सो पॉजिटिव’ नामक ऑनलाइन कैम्पेन की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री अनन्या पांडे का कहना है कि ट्रोलिंग और इस तरह की हरकतें उन कम उम्र युवाओं के दिमाग पर असर छोड़ती है जो बदलाव की उम्र से गुजर रहे होते हैं।
पिछले महीने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सोशल मीडिया पर तब सवाल उठाया गया था, जब उन्होंने कहा था कि उन्होंने यूएससी एनेनबर्ग स्कूल फॉर कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में दाखिला लिया है। इस घटना के बारे में बात करते हुए अनन्या ने कहा, ‘‘हालांकि यह सच है कि इस तरह के ट्रोल्स हमारे ध्यान के काबिल नहीं हैं लेकिन जब यह घटना मेरे साथ हुई, तो इसने न केवल मुझे बल्कि मेरे परिवार और माता-पिता को भी प्रभावित किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘साइबरबुलिंग आम है और यह वास्तव में हम सबको प्रभावित करती है। मेरे इसके खिलाफ खड़े होने की वजह यह है कि लोगों को समझना चाहिए कि ये किस तरह से दूसरों को प्रभावित करती है। अनन्या के मुताबिक, ‘‘जब हम किशोर होते हैं, दूसरे हमारे बारे में क्या कहते हैं उसके आधार पर हम अपने बारे में एक धारणा विकसित कर लेते हैं। एक पूर्ण वयस्क दिमाग का विकास होना अभी हममें बाकी है, इस वजह से जब हमें हमेशा बुरा कहा जाता है तो हम डगमगा जाते हैं। अनन्या ने कहा, ‘‘हमारा शरीर और दिमाग बदलावों के दौर से गुजरता है और यदि ऐसे में कोई शरीर को लेकर कुछ भद्दा कहता है तो इससे बुरा लगता है।’’ उन्होंने कहा कि रचनात्मक आलोचना उन्हें खुद को सुधारने में मदद करती है और इस तरह के आलोचनाओं की वह सराहना करती हैं। उनका मानना है कि लोग दिल को दुखाने वाली बात ज्यादा करते हैं जो कि किसी तरह से आलोचना नहीं होती, भद्दी टिप्पणी होती है।
अनन्या का यह भी कहना है कि उनके पिता कहते हैं कि लोगों की टिप्पणियों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए क्योंकि ये रोज बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता की इस बात से सहमत हैं।

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