समाजवादी आंदोलन की आखिरी कड़ी थे चंद्रशेखर: योगी

  • कहा, चंद्रशेखर और राष्ट्रवाद एक दूसरे के पर्याय

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

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लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुण्यतिथि पर विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित चंद्रशेखर और राष्ट्रवाद विषयक परिचर्चा को संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रशेखर समाजवादी आंदोलन की आखिरी कड़ी थे। चंद्रशेखर और राष्ट्रवाद को एक-दूसरे का पर्याय कहा जाता है। वहीं इस आयोजन में चंद्रशेखर के परिवार से किसी व्यक्ति के न होने के बाद भी उनके विचारों को आगे बढ़ाना सराहनीय है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज के समय में विचारों को आगे बढ़ाना कठिन है, क्योंकि राजनीति के दायरे संकुचित हो गए हैं। आज समाजवाद के कई ब्रैंड मार्केट में देखने को मिल रहे हैं। इसके विकृत व जातिवादी रूप को उत्तर भारत ने दो दशक तक देखा और झेला है। खुद को समाजवाद का पहरेदार बताने वालों ने इसे अराजकता व उद्दंडता का पर्याय बनाकर रख दिया। लोहिया और पूर्व पीएम चंद्रशेखर के विचारों को धूल में मिला दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद किसी मत, किसी जाति या संप्रदाय का बंधक नहीं है। हमारी उपासना विधि अलग-अलग हो सकती है, लेकिन जब कोई राष्ट्रीय अस्मिता को चुनौती देगा तो हम उसका डटकर मुकाबला करेंगे। इस भाव को चंद्रशेखर ने हमेशा प्राथमिकता दी। इसी वजह से उन्होंने समान नागरिक कानून और स्वदेशी जागरण अभियान का समर्थन किया था।

चंद्रशेखर ने विकसित किया नव समाजवाद

विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि चंद्रशेखर, नरेंद्र और लोहिया ने राष्ट्रवाद मिलाकर नव समाजवाद विकसित किया। चंद्रशेखर को कांग्रेस ने बहुत धोखा दिया। उनके अंदर भारत का भाव रचा-बसा था। वहीं नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने कहा कि अपनी दाढ़ी मैंने चंद्रशेखर से ही प्रभावित होकर रखी थी। मैंने अपने एक भतीजे का नाम चंद्रशेखर व दूसरे का जयप्रकाश रखा। राजनीति में लोग एक-दूसरे का चेहरा देखकर बोलते हैं, लेकिन संसद से लेकर सडक़ तक चंद्रशेखर ने कभी यह नहीं सोचा कि सामने वाला क्या सोचेगा। समाज कल्याण मंत्री रमापति राम शास्त्री ने कहा कि चंद्रशेखर जैसे थे, हम उन्हें वैसा समझ नहीं पाए। उनका कद विराट था। कार्यक्रम के आयोजक व चंद्रशेखर ट्रस्ट के संयोजक एमएलसी यशवंत सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर ने देश की समस्या को समझने के लिए पैदल यात्रा की। वे एक देश-एक कानून के हिमायती थे। उनका व्यक्तित्व राष्ट्रवाद का प्रतीक है।

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