सडक़ हादसों में मरते लोग और लचर तंत्र

सवाल यह है कि सडक़ हादसों में होने वाली मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या मुआवजे की रकम देकर सरकार अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ सकती है? क्या हादसे में अपनों को खोने वाले लोगों की भरपाई की जा सकती है? क्या लगातार हो रहे सडक़ हादसों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है?

Sanjay Sharma

यमुना एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों से भरी बस पुल की रेलिंग को तोड़ते हुए गहरे नाले में जा गिरी। आगरा के एतमादपुर में हुई इस दुर्घटना में 29 लोगों ने दम तोड़ दिया जबकि 23 घायल हो गए। यह बस लखनऊ से दिल्ली जा रही थी। सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का ऐलान किया है। साथ ही 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है। सवाल यह है कि सडक़ हादसों में होने वाली मौतों का जिम्मेदार कौन है? क्या मुआवजे की रकम देकर सरकार अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ सकती है? क्या हादसे में अपनों को खोने वाले लोगों की भरपाई की जा सकती है? क्या लगातार हो रहे सडक़ हादसों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है? क्या टै्रफिक नियमों का उल्लंघन, अप्रशिक्षित ड्राइवर और लंबी दूरी के लिए संचालित होने वाली बसों में जरूरी मानकों का पालन नहीं होने के कारण हादसे हो रहे हैं? क्या फर्जी लाइसेंस और सडक़ों की बनावट हादसों की बड़ी वजहें हैं? क्या हाईवे पर लचर निगरानी सिस्टम ने हालात को पूरी तरह बिगाड़ दिया है?
प्रदेश में सडक़ हादसे और इसमें मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले यमुना एक्सप्रेस-वे पर पिछले छह महीने में 95 सडक़ हादसे हुए, जिसमें 94 लोगों की मौत हुई जबकि 120 जख्मी हुए। शुरुआती जांच से पता चला है कि ड्राइवर को नींद आ जाने के कारण बस दुर्घटनाग्रस्त हुई और 29 लोग दुनिया से चले गए। यह एक कारण है। हालात इससे ज्यादा खराब है। यमुना एक्सप्रेस-वे का निर्माण यूपी सरकार ने कराया है और इसका नियंत्रण नोएडा प्राधिकरण के पास है। यहां निगरानी सिस्टम के बावजूद वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। लंबी दूरी की बसों के संचालन में ड्राइवरों की तैनाती के मानकों का पालन भी नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार एक ड्राइवर एक दिन में सिर्फ 400 किमी बस चला सकता है। इसके बाद दूसरे ड्राइवर द्वारा बस चलाने की व्यवस्था है, लेकिन इस बस में एक ही ड्राइवर बताया जा रहा है जबकि लखनऊ से आनन्द विहार, दिल्ली की दूरी 500 किमी से अधिक है। बसों और ट्रकों में लगाए जाने वाले टायर भी मानकों के विपरीत हैं, लिहाजा वे जल्द गरम हो जाते हैं और हादसों का कारण बनते हैं। अप्रशिक्षित ड्राइवर वाहनों को चला रहे हैं। वे लाइसेंस दलालों के जरिए फर्जी तरीके से प्राप्त कर लेते हैं। देश में करीब तीस फीसदी ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हैं। यदि सरकार हादसों पर नियंत्रण लगाना चाहती है तो उसे न केवल ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू कराना होगा बल्कि फर्जी लाइसेंस पर भी रोक लगानी होगी। वहीं सडक़ों का निर्माण मानकों के मुताबिक कराना भी सुनिश्चित करना होगा।

 

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