स्फूर्ति योजना, पारंपरिक उद्योग और रोजगार

सवाल यह है कि क्या यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए साधन उत्पन्न करने में सफल हो पाएगी? क्या यह योजना भी लालफीताशाही का शिकार नहीं हो जाएगी? क्या उत्पादों के लिए सरकार बाजार उपलब्ध कराने में सफल होगी? क्या यूपी में एक जनपद, एक उत्पाद योजना को स्फूर्ति योजना सहयोग कर सकेगी?

Sanjay Sharma

ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने व रोजगार के नए अवसर उत्पन्न करने के लिए केंद्र सरकार ने स्फूर्ति योजना का ऐलान किया है। योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में सौ क्लस्टर बनाए जाएंगे। करीब 50 हजार ग्रामीण शिल्पकारों व दस्तकारों को इसमें शामिल करके उन्हें आर्थिक रूप से समर्थ बनाया जाएगा। इससे बांस उद्योग, शहद उत्पादन और खादी को बढ़ावा दिया जाएगा। सवाल यह है कि क्या यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए साधन उत्पन्न करने में सफल हो पाएगी? क्या यह योजना भी लालफीताशाही का शिकार नहीं हो जाएगी? क्या उत्पादों के लिए सरकार बाजार उपलब्ध कराने में सफल होगी? क्या यूपी में एक जनपद, एक उत्पाद योजना को स्फूर्ति योजना सहयोग कर सकेगी? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लागू करने के लिए गैर भाजपा शासित राज्यों से केंद्र सरकार को सहयोग मिल सकेगा? क्या यह गांवों से हो रहे पलायन को रोकने में सफल होगी? क्या इन छोटे उद्यमियों को बिचौलियों से बचाने में सरकार सफल हो पाएगी?
देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं। कई पारंपरिक उद्योग दम तोडऩे की कगार पर हैं। गांवों में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। इसमें दो राय नहीं है कि पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। स्फूर्ति योजना को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है, लेकिन इसको जमीन पर उतारना मुश्किल है। अधिकांश जनकल्याणकारी योजनाएं लालफीताशाही की भेंट चढ़ चुकी हैं। बिना अफसरशाही के सहयोग के ग्रामीण क्षेत्रों में क्लस्टर बनाना संभव नहीं है। अफसरशाही की हालत यह है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों को नजरअंदाज करती है। इसके अलावा सरकार को इन उत्पादों के लिए स्थानीय बाजार भी उपलब्ध कराना होगा। शिल्पकारों और लघु उद्यमियों को पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना होगा। वहीं सरकार के सामने गैर भाजपा शासित राज्यों में इसको लागू करना भी कम टेढ़ी खीर नहीं है। देखने में आया है केंद्र और राज्य में अलग-अलग दलों की सरकारें होने पर केंद्रीय योजनाओं को संबंधित राज्य में ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यह योजना यूपी में सफल हो सकती है क्योंकि यहां पहले से ही एक जनपद, एक उत्पाद की नीति है। यदि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सृजन करना चाहती है तो उसे उद्यमियों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करना होगा। साथ ही इसके लिए अफसरशाही की जवाबदेही भी तय करनी होगी। यदि ऐसा हुआ तो यह योजना निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की कायापलट कर सकती है।

Loading...
Pin It

Comments are closed.