आपदा पीडि़तों को राहत पहुंचाने वाले एसडीआरएफ के मुख्यालय भवन का निर्माण लटका जिम्मेदार रो रहे बजट का रोना

  • मार्च तक प्रोजेक्ट को किया जाना था पूरा 35 में महज नौ निर्माण कार्य हुए शुरू
  • मुख्यमंत्री ने किया था निर्माण कार्य का लोकार्पण
  • अभी तक जारी हुए 42 करोड़, निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने वालों का भुगतान भी अटका

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाढ़, भूकम्प और आग जैसी आपदाओं में फंसे पीडि़तों को राहत पहुंचाने वाले राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ)का मुख्यालय भवन आज तक अधूरा पड़ा है। हालांकि परियोजना को पूरा करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम अभी तक कुछ कार्य ही हैंडओवर कर सकी है। अधूरे निर्माण को लेकर जिम्मेदार बजट का रोना रो रहे हैं। वहीं अफसरों ने इस अधूरी परियोजना का लोकार्पण तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवा दिया है।
प्रदेश में किसी भी प्राकृतिक व मानवजनित आपदा के समय तत्काल राहत व बचाव कार्यों के लिए राज्य आपदा मोचन बल का गठन किया गया था। इसके मुख्यालय भवन के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। आवासीय एवं अनावासीय निर्माण 12102.85 लाख से होना हैं। परियोजना के लिये जिलाधिकारी लखनऊ ने 16 फरवरी 2016 को ग्राम नूरनगर, भदरसा, परगना-बिजनौर, तहसील सरोजनीनगर में 27.653 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी। साथ ही इस भूमि पर एसडीआरएफ के आवासीय एवं अनावासीय भवनों का निर्माण के लिये कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम नामित किया था। कार्यदायी संस्था ने इसके लिये ठेकेदार प्रभू कंस्ट्रक्शन को अनुबंधित किया। इस परियोजना में 12102.85 लाख रुपये की लागत से आवासीय भवनों में श्रेणी-2 के 22 आवास एवं श्रेणी-3 में कुल 72 आवासों के निर्माण होने हैं। 500 जवानों के रहने के लिये बैरक, प्रशासनिक भवन, परिवहन शाखा, ओवर हैड टैंक, वेयर हाउस, सब स्टेशन सहित कुल 35 निर्माण कार्य कराने की योजना थी। पर, इनमें से अभी तक महज नौ कार्यों पर ही निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सका है। निर्माण कार्य जनवरी 2017 में श्ुारू हुआ और इसे मार्च 2019 तक पूरा करना था। निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरे पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों ने वाहवाही लूटने के लिए इस मुख्यालय भवन निर्माण परियोजना का लोकार्पण10 मार्च 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों करा दिया था। उम्मीद थी कि इससे अधूरे कार्यों की गति तेज होगी। पर, यह और सुस्त हो गई। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक, अवर अभियंता सहित अन्य स्टाफ इसका कारण बजट का अभाव बता रहे हैं। साथ ही निर्धारित समय सीमा निकलने के बावजूद इस परियोजना के अधूरे निर्माण कार्यों के अन्य कारण भी चर्चा का विषय हैं। वहीं ठेकेदार द्वारा निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं का बकाया भुगतान न करना भी चर्चा में है।

मुख्य बिंदु
परियोजना का नाम: राज्य आपदा मोचन बल, उत्तर प्रदेश (मुख्यालय भवन निर्माण)
परियोजना का क्षेत्रफल: 27.653 हेक्टेयर
कार्य की लागत: 12102.85 लाख (9643.01 लाख अनावासीय और 2459.84 लाख आवासीय)
कार्य प्रारम्भ करने की तिथि: जनवरी 2017
कार्य पूर्ण करने की तारीख: मार्च 2019
कार्यदायी संस्था: उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम
ठेकेदार: प्रभू कंस्ट्रक्शन, गोमती नगर लखनऊ
वर्तमान स्थिति: निर्माण कार्य अब तक है अधूरा

क्या कहना है परियोजना प्रबंधक का
राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक संजय वर्मा का कहना है कि निर्माण कार्य के लिये तीन किश्तों में अभी तक 42 करोड़ जारी किये हैं। चौथी किस्त के तहत 13 करोड़ जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जितना धन जारी किया गया है, उसके सापेक्ष यूपीआरएनएन ने निर्माण कार्य कराये हैं। जहां तक संबंधित ठेकेदार द्वारा आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान न करने का मामला है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

 

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