भ्रष्टïाचार पर नकेल के निहितार्थ

सवाल यह है कि क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे सरकारी तंत्र को अपनी चपेट में ले लिया है? पूर्व की सरकारों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? क्या भ्रष्टïाचार का यह खेल ऊपर से नीचे तक खेला जा रहा है? सीएम की हिदायतों के बावजूद कर्मचारी सुधरने का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं? क्या सरकारी विभाग नाकारापन और भ्रष्टïाचार के अड्डे बन चुके हैं? क्या इस कार्रवाई का असर दिखेगा?

Sanjay Sharma

योगी सरकार भ्रष्टïाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर तेजी से आगे बढ़ती नजर आ रही है। सीएम ने भ्रष्टïाचार पर रोक लगाने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के लिए 600 कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की है। भ्रष्टïाचार के दोषी पाए गए दो सौ कर्मियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है। इसके अलावा सौ से अधिक अन्य कर्मचारी भी रडार पर हैं। सवाल यह है कि क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे सरकारी तंत्र को अपनी चपेट में ले लिया है? पूर्व की सरकारों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? क्या भ्रष्टïाचार का यह खेल ऊपर से नीचे तक खेला जा रहा है? सीएम की हिदायतों के बावजूद कर्मचारी सुधरने का नाम क्यों नहीं ले रहे हैं? क्या सरकारी विभाग नाकारापन और भ्रष्टïाचार के अड्डे बन चुके हैं? क्या इस कार्रवाई का असर दिखेगा? क्या प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति सफल हो सकेगी? क्या घपले और घोटालों पर लगाम लग पाएगी?
प्रदेश की कमान संभालते ही सीएम योगी ने साफ कर दिया था कि वे भ्रष्टïाचार को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। हर बैठक में वे कर्मचारियों व अफसरों को कामकाज में लापरवाही और भ्रष्टïाचार से दूर रहने की चेतावनी देते रहे लेकिन इसका असर कर्मियों पर पड़ता नहीं दिखा। विभिन्न विभागों में पूर्ववत घपले और घोटाले होते रहे। भ्रष्टïाचारियों ने कल्याणकारी योजनाओं तक को नहीं छोड़ा। अधिकांश कर्मचारी समय पर ऑफिस नहीं आते थे। काम के एवज में सुविधा शुल्क लिया जाता रहा। इन सबकी शिकायत सीएम तक पहुंचती रही। विपक्ष भी इस मामले में सरकार को घेरती रही। भाजपा के एजेंडे में भ्रष्टïाचार को समाप्त करना शामिल है। इसी आधार पर पार्टी ने चुनाव में वोट मांगे थे। लिहाजा बढ़ते भ्रष्टïाचार पर नकेल कसना जरूरी हो गया था। भ्रष्टïाचार की शिकायतों का पुलिंदा बढ़ता गया तो सरकार एक्शन में आ गई। दागियों को चिन्हित करने का काम शुरू हुआ और दोषियों के खिलाफ सीएम ने कठोर फैसले लिए। सबसे अधिक दागी गृह विभाग में चिन्हित किए गए। इनकी संख्या 51 है। इसके अलावा राजस्व, दुग्ध, चीनी उद्योग एवं गन्ना, खादी एवं ग्रामोद्योग, नगर विकास व आबकारी, बाल एवं पुष्टाहार, प्राविधिक शिक्षा, कारागार प्रशासन एवं सुधार, बेसिक शिक्षा, लघु सिंचाई एवं भूगर्भ जल, आवास एवं शहरी नियोजन समेत कई विभागों में भ्रष्टïाचार के दोषी मिले। इसमें दो राय नहीं है कि भ्रष्टïाचार के खिलाफ की गई इस कार्रवाई का असर दूर तक पड़ेगा। अब कर्मचारी और अफसर भ्रष्टïाचार करने से डरेंगे। घपले और घोटालों पर भी अंकुश लगेगा। इसका फायदा निश्चित रूप से आम आदमी को मिलेगा। काम करने के एवज में सुविधा शुल्क लेने की कर्मियों की आदत पर भी लगाम लगेगी।

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