समस्याओं का अंबार और लापरवाह तंत्र

सवाल यह है कि नाला सफाई के नाम पर आया भारी भरकम बजट कहां खर्च हो रहा है? बारिश के मौसम में हर साल राजधानी की सडक़ें नाले में क्यों तब्दील हो जाती हैं? समस्या का स्थायी हल क्यों नहीं निकाला जा रहा है? इस लापरवाही के लिए क्या नगर निगम जिम्मेदार नहीं है? क्या जलभराव लोगों की सेहत के लिए खतरनाक नहीं है? क्या लोगों से टैक्स वसूलना भर नगर निगम की जिम्मेदारी है?

Sanjay Sharma

बारिश के साथ प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फैली अव्यवस्था सतह पर आ गई है। पिछले दिनों हुई बारिश ने नगर निगम की लापरवाही और नाला सफाई के दावों की पोल खोल दी। सडक़ों पर घुटने पर पानी भर गया। लाखों की लागत से गीतापल्ली में बनाया गया नाला ढह गया। रही सही कसर खुदी सडक़ों ने निकाल दी। लोग गंदे पानी से डूबी सडक़ों से होकर अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए मजबूर हुए। कई जगहों पर जल निकासी ठप रही है। सवाल यह है कि नाला सफाई के नाम पर आया भारी भरकम बजट कहां खर्च हो रहा है? बारिश के मौसम में हर साल राजधानी की सडक़ें नाले में क्यों तब्दील हो जाती हैं? समस्या का स्थायी हल क्यों नहीं निकाला जा रहा है? इस लापरवाही के लिए क्या नगर निगम जिम्मेदार नहीं है? क्या जलभराव लोगों की सेहत के लिए खतरनाक नहीं है? क्या लोगों से टैक्स वसूलना भर नगर निगम की जिम्मेदारी है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरी व्यवस्था को पंगु कर दिया है? क्या ऐसे ही लखनऊ को स्मार्ट बनाने का सपना साकार होगा?
हर साल बारिश में लखनऊ की हालत खराब हो जाती है। हालांकि सरकार की ओर से बारिश के पहले नालों की सफाई करने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भारी भरकम बजट दिया जाता है। नगर निगम ने नालों की सफाई का दावा भी कर दिया, लेकिन बारिश होते ही लापरवाही दिखने लगी। पहली बारिश में ही राजधानी की सडक़ों पर नाले उफना गए। जाहिर है केवल कागजों पर नालों की सफाई की गई। जगह-जगह पाइप लाइन बिछाने के नाम पर सडक़ें खोद दी गई हैं। इससे यहां कीचड़ और जलभराव हो गया है। यह लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। जलभराव के कारण संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। नाला निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही वजह है कि गीतापल्ली में तीस लाख से बनाया गया नाला बारिश के पानी का बेग संभाल नहीं सका और देखते-देखते ढह गया। शहर के पॉश कॉलोनी में बसा नया गांव में जल निकासी ठप हो गई। यहां जलनिकासी के लिए बनवाया गया नाला सडक़ से ऊंचा बनाया गया है लिहाजा पानी लोगों के घरों में घुस रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि इन समस्याओं का आज तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जब लखनऊ का यह हाल है तो दूसरे जिलों के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि सरकार शहर को स्मार्ट बनाने का सपना पूरा करना चाहती है तो उसे जिम्मेदार विभागों के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेना होगा। साथ ही समस्या के स्थायी समाधान पर भी फोकस करना होगा।

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