संक्षिप्त खबरें

महिला को नहीं मुहैया कराया वेंटिलेटर, मौत
लखनऊ। सरकार भले ही प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करे लेकिन मरीज इन सारी सुविधाओं से कोसों दूर हैं। बलरामपुर अस्पताल में गंभीर हालत में आई महिला को आईसीयू में वेंटिलेटर खाली होने बाद भी नहीं मुहैया कराया गया। वेंटिलेटर के अभाव में महिला की मौत हो गई। बलरामपुर जिले की रहने वाली महिला मरीज अनीता (35) को ब्रेन हैमरेज हुआ था। तीमारदार गंभीर हालत में उसे केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर लाए थे। जहां डॉक्टर जांच-पड़ताल के लिए दौड़ाते रहे और उसे बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। तीमारदारों ने उसे बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया। महिला की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने के लिए लिखा था। पति जगद अफसर-डॉक्टरों के आगे वेंटिलेटर देने के लिए गिड़गिड़ाता रहा मगर नहीं मिला। पति का आरोप है कि आईसीयू में कई वेंटिलेटर खाली पड़े थे। लिहाजा इलाज दौरान उसकी मौत हो गई।

अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट प्रमोशन प्रोग्राम में कई देशों के प्रतिनिधियों ने की शिरकत
लखनऊ। यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, रूस, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ईरान, हांगकांग, मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम, सिंगापुर और बांग्लादेश जैसे प्रमुख 16 देशों के खरीदारों ने लखनऊ स्थित होटल रमाडा में हो रहे एक्सपोर्ट प्रमोशन प्रोग्राम और रिवर्स बायर्स व सेलर मीट में हिस्सा लिया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोड्क्टस एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) व फिक्की द्वारा डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री व उत्तर प्रदेश मंडी परिषद् के सहयोग से आम व उससे जुड़े अन्य उत्पादों, फलों और सब्जियों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किया गया।

त्वचा रोग कार्यशाला का आयोजन
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में लेजर विधि से त्वचा रोग के 25 मरीजों का इलाज कार्यशाला में प्रयोग के तौर पर किया गया। बलरामपुर के निदेशक डॉ. राजीव लोचन, सीएमएस डॉ. ऋषि सक्सेना और एमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस मौके पर त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएएच उस्मानी और डॉ. अजय कुमार ने मरीजों का इलाज किया। इस मौके पर डॉ. उस्मानी ने बताया कि लेजर विधि से मरीजों का इलाज करने के लिए बलरामपुर अस्पताल से एक प्रस्ताव शासन स्तर से यूपीएचएसएसपी के पास भेजा गया था। जहां से प्रस्ताव तो पास हो गया था, लेकिन बजट अभी नहीं मिला है। इस प्रस्ताव में करीब 20 लाख रुपए तक का बजट मिलना है। इससे सरकारी अस्पताल में मरीजों को नि:शुल्क इलाज मिल सकेगा।

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