बदतर चिकित्सा सेवाएं सरकार और सवाल

सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सेवाएं बद से बदतर क्यों होती जा रही हैं? क्या सरकार गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में नाकाम है? क्या अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सों की कमी ने स्थितियों को बिगाड़ दिया है? करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते क्यों चले जा रहे हैं?

Sanjay Sharma

यूपी में चिकित्सा सेवाओं को लेकर नीति आयोग की आई ताजा रिपोर्ट चिंतित करने वाली है। स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत नाम से जारी रिपोर्ट में राज्यों की रैंकिंग में यूपी सबसे निचले 21वें पायदान पर है। यह रैंकिंग 23 संकेतकों के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें शिशु मृत्यु दर, प्रजनन दर, स्त्री-पुरुष अनुपात, जन्म पंजीकरण, खाली पड़े चिकित्सकों और नर्सों के पदों आदि को शामिल किया गया है। सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सेवाएं बद से बदतर क्यों होती जा रही हैं? क्या सरकार गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में नाकाम है? क्या अस्पतालों में चिकित्सकों और नर्सों की कमी ने स्थितियों को बिगाड़ दिया है? करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते क्यों चले जा रहे हैं? क्या भ्रष्टïाचार ने चिकित्सा सेवाओं को अपनी चपेट में ले लिया है? आम आदमी को कल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है? अस्पतालों को दवाओं और अत्याधुनिक जांच उपकरणों की कमी से क्यों जूझना पड़ रहा है? क्या पूरे तंत्र में आमूल परिवर्तन की जरूरत है?
नीति आयोग की रिपोर्ट चिकित्सा सेवाओं पर यूपी समेत देश के तमाम राज्यों को आईना दिखा रही है। हैरानी की बात यह है कि यूपी के अलावा बिहार, ओडिशा और उत्तराखंड की चिकित्सा सेवाएं पहले से अधिक खराब हुई हैं। यूपी के तमाम सरकारी अस्पताल मानव संसाधन की कमी से जूझ रहे हैं। यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य मेडिकल स्टाफ की बेहद कमी है। जांच उपकरणों और दवाओं का टोटा है। इसके कारण मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता है। पूरा तंत्र लापरवाही का शिकार है। अस्पतालों में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। अधिकांश अस्पतालों में चिकित्सक और अन्य कर्मी समय पर नहीं आते हैं। आम आदमी को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ तक नहीं मिल पा रहा है। लखनऊ समेत प्रदेश के तमाम जिलों में अभी तक आयुष्मान योजना के सभी लोगों के कार्ड नहीं बन सके हैं। जाहिर है, गरीब मरीज इस कार्ड के बिना महंगा इलाज कैसे करा पाएगा। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। अधिकांश सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं होते हैं। वहीं प्राथमिक केंद्र टीकाकरण के सेंटर बनकर रह गए हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दे चुकी है। यदि सरकार चिकित्सा सेवाओं में सुधार लाना चाहती है तो उसे न केवल पूरी व्यवस्था में आमूल परिवर्तन करना होगा बल्कि सरकारी अस्पतालों में व्याप्त भ्रष्टïाचार को भी खत्म करना होगा।

Loading...
Pin It

Comments are closed.