4PM! खबरची, कुछ मीठी मिर्ची

फिर मैदान में बाबा जी

जब से बाबाजी ने सिंहासन पर बैठना शुरू किया है, उनकी हालत खराब है। एक मामला निपटता नहीं है, दूसरा मुंहबाए खड़ा हो जाता है। अभी अपने सहयोगी को बडक़ी कुर्सी पर आसीन कराने के लिए जमीन आसमान एक चुके हैं। भाषण दे-देकर गला सूख गया था। वह तो भला हो आयोग का जिसने दो-तीन दिन जबरन चुप करा दिया वर्ना गले का कबाड़ा ही हो जाता। माइक से बोलने पर भी आवाज सुनाई नहीं पड़ती। सोचा था थोड़ा सुस्ता लेंगे, लेकिन सहयोगियों ने फिर कुर्सी का खेल शुरू कर दिया है। अब फिर से चलो मैदान में दो-दो हाथ करने। अब बाबाजी क्या करें। साख दांव पर लगी है। सबसे बड़े युद्ध में इज्जत बचा ली है। अब इस युद्ध को भी लडऩा होगा। सो बैठक लेने
में जुटे हैं। पता नहीं कौन सा दांव चलना पड़े।

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