मिलावटखोरों पर शिकंजा कब ?

सवाल यह है कि कड़े कानूनों के बावजूद मिलावटखोरों के हौसले बुलंद क्यों हैं? खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग क्या कर रहा है? क्या यह धंधा कर्मियों और मिलावटखोरों की मिलीभगत से चल रहा है? क्या मिलावटखोरों पर नियंत्रण लगाने में संबंधित विभाग नाकाम हो चुका है? क्या लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है?

Sanjay Sharma

्रदेश में मिलावटखोरी का बाजार गर्म है। मोटे मुनाफे के लिए खाद्य पदार्थो में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। मिलावटी वस्तुएं लोगों की सेहत पर खराब असर डालती हैं। बावजूद इसके राजधानी समेत प्रदेश के तमाम जिलों में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान नहीं चलाया जा रहा है। सवाल यह है कि कड़े कानूनों के बावजूद मिलावटखोरों के हौसले बुलंद क्यों हैं? खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशसन विभाग क्या कर रहा है? क्या यह धंधा कर्मियों और मिलावटखोरों की मिलीभगत से चल रहा है? क्या मिलावटखोरों पर नियंत्रण लगाने में संबंधित विभाग नाकाम हो चुका है? क्या लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है? क्या सरकार मिलावटी वस्तुओं को लेकर गंभीर नहीं है? क्या अभियान चलाने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है?
प्रदेश में दूध से लेकर तेल और मसाले से लेकर दालों तक में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है। ये मिलावटखोर दुकानदारों से मिलकर धंधा चला रहे हैं। राजधानी में पिछले दिनों मिलावट के कई मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद मिलावटखोरों को लेकर कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। वस्तुओं की गुणवत्ता की निगरानी का काम खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास है। विभाग को खाद्य वस्तुओं के नमूने भरने, उसकी गुणवत्ता की जांच कराने और दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने के अधिकार हैं। इसके लिए सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। फिर भी स्थितियों में सुधार होता नहीं दिख रहा है। मिलावटखोरों के खिलाफ खानापूर्ति के लिए अभियान चलाए जाते हैं। कई बार छापेमारी के पहले ही मिलावटखोरों को जानकारी मिल जाती है। जाहिर है यह बिना विभागीय कर्मचारी की मिलीभगत के संभव नहीं है। जब राजधानी में यह हाल है तो अन्य जिलों की स्थिति के बारे में आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। ये मिलावटखोर ग्रामीण इलाकों या शहर के सघन आबादी वाले क्षेत्र में अपना कारोबार करते हैं। यहां वे वस्तुओं में मिलावट कर आसपास के क्षेत्रों में वस्तुओं की सप्लाई करते हैं। मसालों और सरसों के तेल में घातक रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं दूध और दालों में मिलावट कर बेचा जा रहा है। यह स्थिति तब है जब मिलावटखोरी पर जुर्माना और सजा दोनों का प्रावधान है। चिकित्सकों के मुताबिक मिलावटी खाद्य पदार्थ खतरनाक हैं। यह पाचनतंत्र समेत शरीर के विभिन्न अंगों पर विपरीत असर डालते हैं। अगर सरकार मिलावटखोरी को खत्म करना चाहती है कि उसे इनके खिलाफ सतत अभियान चलाना होगा। मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी और विभागीय भ्रष्टïाचार को खत्म करना होगा।

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