आखिर कब लेंगे हादसों से सबक?

सवाल यह है कि सडक़ हादसों और इसमें मरने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है? क्या चालकों की लापरवाही के कारण तमाम हादसे हो रहे हैं? क्या जागरूकता अभियान का असर नहीं पड़ रहा है? क्या सावधानी हटी, दुर्घटना घटी जैसे प्रभावी स्लोगन भी लोगों को प्रभावित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं?

SAnjay Sharma

प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नगराम क्षेत्र में बारातियों से भरी पिकअप वैन इंदिरा नहर में गिर गई। 22 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। पांच बच्चों के शव बरामद हुए हैं जबकि दो लापता है। सवाल यह है कि सडक़ हादसों और इसमें मरने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है? क्या चालकों की लापरवाही के कारण तमाम हादसे हो रहे हैं? क्या जागरूकता अभियान का असर नहीं पड़ रहा है? क्या सावधानी हटी, दुर्घटना घटी जैसे प्रभावी स्लोगन भी लोगों को प्रभावित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं? क्या जानलेवा जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति ने हादसों को बढ़ा दिया है? क्या बिना मानकों को ध्यान में रखकर निर्मित की गई सडक़ें हादसों की वजह बन रही हैं? क्या रफ्तार के आगे यातायात के नियमों का पालन करने में कोताही बरती जा रही है? क्या बढ़ते हादसों को रोकने के लिए सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी?
उत्तर प्रदेश में सडक़ हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। तमाम जागरूकता अभियानों के बावजूद चालकों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। शहर से लेकर गांवों तक में वाहन चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं। वे मोड़दार सडक़ों पर लिखे निर्देशों तक का पालन नहीं करते हैं। सवारी वाहनों के चालक लापरवाही और जानलेवा जोखिम से गाडिय़ों को सडक़ पर दौड़ाते हैं। नगराम में हुआ हादसा इसी लापरवाही का नतीजा है। तेज रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित होकर नहर में समा गया। दूसरी ओर हादसों का एक कारण मानकविहीन सडक़ें हैं। सडक़ निर्माण में भ्रष्टïाचार इस कदर व्याप्त है कि नयी बनी सडक़ पहली ही बारिश में बह जाती है। सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। बावजूद इस ओर सरकार पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। नशे और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना भी हादसों की वजह है। ऐसे कई हादसे सामने आ चुके हैं। यही नहीं बिना किसी प्रशिक्षण के सडक़ों पर सवारी वाहन चलाने वाले भी हादसों को न्योता दे रहे हैं। दूसरी ओर यातायात पुलिस भी बेहद लापरवाह है। वह यातायात नियमों का पालन कराने को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। यातायात पुलिस टै्रफिक नियमों को तोडऩे वालों को अक्सर नजरअंदाज कर देती है, जिसके कारण स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं। युवा भी फर्राटा भरते हैं। यदि सरकार ऐसे हादसों पर नियंत्रण लगाना चाहती है तो उसे यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ न केवल कठोर कार्रवाई करनी होगी बल्कि सडक़ों पर यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त करना होगा।

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