4PM! खबरची, कुछ मीठी मिर्ची

हम नहीं सुधरेंगे

बाबाजी जब से आसन छोड़ सिंहासन पर विराजमान हुए हैं, परेशान हैं। उनके मातहत रोज कोई न कोई कारनामा कर देते हैं। कुछ नहीं मिला तो फाइल ही दबा कर बैठ जाते हैं। जेब गर्म करने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। भ्रष्टïाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति गई तेल लेने। विरोधी पहले से पीछे पड़े हुए हैं। जब देखो बाबाजी को चिढ़ा देते हैं। देख लीजिए बाबाजी। रोज क्राइम हो रहा है। भ्रष्टïाचार हो रहा है और आप बस मीटिंग करते रहिए। आपके मातहत सुधरने वाले नहीं है। पुराने जडिय़ल हैं। ये आंखों से काजल तक चुरा लेते हैं। माल कहां गया इसका पता भी नहीं लगने देते। बाबाजी की हिदायत का भी कोई असर नहीं पड़ता दिख रहा है। मीटिंग में बाबाजी की डांट-फटकार एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देते हैं। अब बाबाजी को भी समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। आखिर कड़ाई से समझा दिया, अब कोई गड़बड़ की तो खैर नहीं। जब से बाबाजी की भंगिमा बदली है, मातहत इसकी काट खोजने में जुट गए हैं।

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