हमारी संस्कृति पर हावी हिंसक प्रवृत्ति

आजकल ऐसी अनेकों घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें लोग अपनी जिद और झूठी शान के कारण गरीबों और कमजोरों को प्रताडि़त करते हैं। हमने सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत से वीडियो देखे हैं, जिनमें बहू अपनी सास को बुरी तरह मारती-पीटती है, बेटा अपनी मां और बाप को पीटकर घर से बाहर निकाल देता है।

Sanjay Sharma

भारत अनेकों जातियों, धर्मों, सम्प्रदायों और वर्गों से मिलकर बना हुआ है। विविध रंग, रूप और भाषाओं वाली हमारी संस्कृति सम्पूर्ण विश्व को अपना समझने की सीख देती है। संस्कृत का श्लोक ‘अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम, उदारचरितानाम तु वसुधैव कुटुम्बकम’ हमारी संस्कृति का परिचायक है। इसका अर्थ है कि यह मेरा है,यह उसका है, ऐसी सोच संकुचित चित्त वाले व्यक्तियों की होती है, इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है। लेकिन आजकल समाज में हिंसा और वैमनस्यता की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। ताजा मामला कर्नाटक के कोडिगेहल्ली का है, जहां एक महिला को बिजली के खंभे में बांधकर लोगों ने बुरी तरह पीटा। महिला के आस-पास खड़े लोग मारपीट करने वालों को उकसा रहे थे। महिला का कसूर यह था कि उसने गांववालों से लिया कर्जा नहीं चुकाया था। जब इस मामले का खुलासा हुआ तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। लेकिन गांव के किसी व्यक्ति ने महिला को बचाने का प्रयास नहीं किया।
आजकल ऐसी अनेकों घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें लोग अपनी जिद और झूठी शान के कारण गरीबों और कमजोरों को प्रताडि़त करते हैं। हमने सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत से वीडियो देखे हैं, जिनमें बहू अपनी सास को बुरी तरह मारती-पीटती है, बेटा अपनी मां और बाप को पीटकर घर से बाहर निकाल देता है। मां अपने बच्चे को बुरी तरह पीटती है। सवर्ण दलित को पीटता है। लोग उस घटना का वीडियो बनाते हैं, मजे लेते हैं, लेकिन उस व्यक्ति को छुड़ाने नहीं जाते। जबकि पहले के लोग ऐसी किसी भी घटना को रोकने और मामला सुलझाने की कोशिश करते थे। वह अपरिचित व्यक्ति को भी बचाने की हर संभव कोशिश करते थे। मां-बाप या सास-ससुर के साथ गलत करने वालों को सबके सामने बुलाकर डांटा फटकारा और समझाया जाता था। इसका असर भी लोगों पर दिखता था। लोकलाज के डर से ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होती थीं। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। समाज विभिन्न वर्गों और विचारधाराओं में बंट चुका है। परिवार में हर कोई अपनी सोच को सही और दूसरे की सोच को गलत साबित करने में जुटा है। किसी में भी बर्दाश्त करने की शक्ति नहीं रही। इसलिए लोग हिंसक होते जा रहे हैं। जो दम तोड़ती मानवीय संवेदनाओं का सच उजागर करने के लिए काफी है। इसलिए अपने बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कृति की जानकारी अवश्य दें। अन्यथा बाद में पछताने से भी कुछ हासिल नहीं होगा।

 

Loading...
Pin It