नहीं बदल रहे पाक के नापाक इरादे

विश्व के सभी देश अच्छी तरह जानते हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। अमेरिका ने भी पाकिस्तान का केवल इस्तेमाल ही किया है। नतीजतन पाकिस्तान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। देश की सरकार को चलाने के लिए उसको जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाकर राजस्व वसूलना पड़ रहा है।

Sanjay Sharma

इमरान खान ने अगस्त 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के साथ ही भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार को अहमियत देने की बात कही थी। साथ ही रिश्तों में खटास के पीछे जो भी वजहें हैं, उन्हें बातचीत के माध्यम से सुलझाने का इरादा भी जाहिर किया था, लेकिन उनके पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद तकरीबन 11 महीनों के अंदर ही कश्मीर में चार बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं। जो इमरान के सीमा पार के आतंकी गतिविधियों को रोकने के बड़े-बड़े वादों को झुठलाने के लिए काफी हैं। ऐसे में भारत सरकार को भी पाकिस्तान के खिलाफ अपने कड़े रुख को बरकरार रखना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान को उसी की भाषा में सबक सिखाना चाहिए।
विश्व के सभी देश अच्छी तरह जानते हैं कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। अमेरिका ने भी पाकिस्तान का केवल इस्तेमाल ही किया है। नतीजतन पाकिस्तान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। देश की सरकार को चलाने के लिए उसको जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाकर राजस्व वसूलना पड़ रहा है। पाकिस्तान की कठपुतली सरकार को चलाने वाली वहां की सेना की कमान प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से दहशतगर्दों के हाथ में हैं, जो खुलेआम पाकिस्तान में रहते हैं। यहीं पर पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर भारत में हमले करने की साजिश रची जाती है, जिसे भारत की सीमा में रहने वाले कुछ अलगाववादियों की मदद से अंजाम तक पहुंचाया जाता है। आंकड़ों पर गौर करें तो जम्मू-कश्मीर में 2014 से दिसंबर 2018 तक 1213 आतंकी घटनाएं हुईं। इनमें 183 लोग और 838 आतंकी मारे गए। इस दौरान देश के अन्य स्थानों में सिर्फ 6 आतंकी घटनाएं हुई है। इनमें 11 लोग और 7 आतंकियों की मौत हुई है। इस दौरान आतंकियों से संघर्ष में विभिन्न भारतीय सैन्य बलों के 198 जवान शहीद हो गए। लोकसभा में पेश दस्तावेज इन घटनाओं की गवाही देते हैं। पाकिस्तान ने तीन साल में 4281 बार संघर्ष विराम तोड़ा और 74 बार घुसपैठ की कोशिश की, जिसे भारतीय सैन्यबलों ने नाकाम कर दिया।
ऐसे में भारत को पाकिस्तान के नापाक इरादों को कुचलने के लिए साम, दाम, दंड, भेद की नीति को बनाये रखना होगा। उस पर विश्वास करना और ढील देना बिल्कुल भी सही नहीं होगा। इसलिए बेहतर है कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने और हर तरह से कमजोर करने की नीति पर हम कायम रहें। अपनी सेना को मजबूत करें और पाकिस्तान को करारा जवाब दें। शायद तभी उसे अपनी गलती का एहसास होगा।

 

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