सरकारी तंत्र की गलती और सोशल मीडिया

अच्छे लोगों और शख्सियतों से जुडक़र अपने ज्ञान और स्टेटस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। इन सबके बावजूद सोशल मीडिया का इस्तेमाल गलत कामों के लिए भी होने लगा है। यहां किसी के खिलाफ लिखना और बोलना मना नहीं है, लेकिन सब कुछ मर्यादित ढंग से होना चाहिए।

SAnjay Sharm,a

सोशल मीडिया व्यक्ति के मन के अंदर जो कुछ भी चल रहा है, उससे आस-पास जो कुछ भी घटित हो रहा है, पूर्व में जो कुछ भी घटित हुआ था या आने वाले समय में जो कुछ भी घटित हो सकता है, उसको लेकर अपने विचार और अभिव्यक्ति का एक बड़ा साधन बन गया है। यह एक ऐसा ग्लोबल माध्यम बन चुका है, जहां हम अपनी समस्याएं डालकर अपना समाधान प्राप्त कर सकते हैं। अच्छे लोगों और शख्सियतों से जुडक़र अपने ज्ञान और स्टेटस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। इन सबके बावजूद सोशल मीडिया का इस्तेमाल गलत कामों के लिए भी होने लगा है। यहां किसी के खिलाफ लिखना और बोलना मना नहीं है, लेकिन सब कुछ मर्यादित ढंग से होना चाहिए। जो लोग अमर्यादित बयान देते हैं या लिखते हैं, उन्हें खुद ही अपने किए की सजा मिलती है। लेकिन आम जनता और पुलिस दोनों को ही ध्यान रखना होगा कि हम क्या कह या कर रहे हैं, इसका प्रभाव और दुष्प्रभाव किस पर पड़ेगा। हमारी छोटी सी हरकत का लोकल, नेशनल या इंटरनेशनल स्तर पर क्या रिएक् शन हो सकता है, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री को लेकर सोशल मीडिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में एक स्वतंत्र पत्रकार को लखनऊ की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसको मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और मजिस्ट्रेट ने भी 11 दिन के लिए जेल भेज दिया। पत्रकार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को जमकर फटकार लगाई। पत्रकार को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। लेकिन मामले की जांच पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई। इस हरकत से यूपी पुलिस के साथ-साथ राज्य सरकार की भी काफी किरकिरी हुई। वहीं पत्रकार भी काफी लोकप्रिय हो गया। लोग उसको बचाने के लिए सडक़ों पर उतर आये। जबकि इन लोगों का उससे कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं था। वे उसको जानते भी नहीं थे।
यदि पुलिस चाहती तो फेसबुक पर अमर्यादित पोस्ट करने वाले पत्रकार से संपर्क कर पोस्ट डिलीट करवा देती। उसको थाने बुलाकर माफीनामा लिखवाकर और कुछ मुचलका लेकर छोड़ सकती थी। क्योंकि जिस पोस्ट को लेकर इतना हंगामा हुआ उसको किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया था। अफसोस पुलिस ने उसे गंभीरता से लिया और सरकार की किरकिरी करा दी। इसलिए सबसे जरूरी सरकारी तंत्र में सुधार है। जो हकीकत में दिखना चाहिए।

 

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