क्षय रोग से मुक्ति के लिए सरकार ने कसी कमर

  • प्रदेश भर में चलाया जा रहा क्षय रोगी खोजी अभियान
  • स्वास्थ्य विभाग की 250 टीमों ने संभाली जिम्मेदारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश सराकर राज्य को क्षय रोग यानी टीबी मुक्त बनाने के लिए कमर कस चुकी है। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से क्षय रोगियों की पहचान में योगदान देने की अपील की है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की करीब 250 टीमों के माध्यम से रोगियों की पहचान करने और उन्हें उपचार दिलाने का अभियान चलाया जा रहा है। जो व्यापक स्तर पर लोगों को लाभान्वित करने में जुटा है।
स्वास्थ्य विभाग ने अपने सभी सहयोगियों व कर्मचारियों को अपना शत प्रतिशत देते हुए पूरे मनोयोग के साथ अभियान सफल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। क्षय रोगियों की पहचान का काम शुरू हो चुका है, इस अभियान में जो भी रोगी मिलेंगे उनको उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मकसद क्षय रोग का खात्मा है। भारत सरकार ने 2021 तक लखनऊ को क्षय रोग मुक्त शहर बनाने का निर्णय लिया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने टीबी कर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहा कि इस खोजी अभियान के लिए 250 टीमें बनायी गयीं हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीके सिंह ने बताया कि सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा डायबिटीज से ग्रसित रोगियों में जीवन पर्यंत 30प्रतिशत अधिक टीबी होने की सम्भावना रहती है। उन्होंने बताया कि जिले में 10 जून से 22 जून तक सघन टीबी खोज अभियान जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा शहर में स्थापित 6 टीबी यूनिट की मलिन बस्तियों में चलाया जायेगा। उक्त गतिविधि के दौरान जिले में व्यापक स्तर पर प्रचार प्रसार व प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिला पब्लिक प्राइवेट ज्वाइंट समन्वयक रामजी वर्मा ने बताया कि इस अभियान में 795 कर्मचारियों का एक दल लगभग 5,30, 000 लोगों की स्क्रीनिंग कर समाज में छुपे हुये क्षय रोगियों को खोज कर उन्हें उपचार पर लाएंगे। उन्होंने बताया कि इस अभियान में 53 पर्यवेक्षकों के अधीन 250 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें कुल 795 सक्रिय व प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर क्षय रोगियों की पहचान की जायेगी।

2025 का सपना पूरा करना आसान

सेंट्रल एवं एक्जीक्यूटिव कमेटी टीबी एसो. ऑफ इंडिया के सदस्य डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सन 2025 तक टीबी के खात्मे के सपने को तब तक पूरा नहीं किया जा सकता है जब तक कि हम लोगों का पोषण नहीं सही करते। ज्ञात रहे कि देश और प्रदेश में पांच साल से कम उम्र के आधे से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं और फास्ट फूड और डाइटिंग प्रथा से लोगों का पोषण असंतुलित होता जा रहा है, जिससे टीबी को बढ़ावा मिल रहा है।

बीमारी फैलने के कारण

किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पल्मोनरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है जो कि माइक्रो बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस से फैलता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में करीब दो बिलियन (200 करोड़) टीबी के मरीज हैं। जबकि भारत में 50 करोड़ लोग टीबी से संक्रमित हैं किन्तु इन सभी को टीबी की सक्रिय बीमारी नहीं है। दुनिया में जहां सक्रिय टीबी रोगियों की तादाद एक करोड़ है वहीं भारत में यह संख्या करीब 28 लाख है। अब सवाल यह उठता है कि हर संक्रमित को यह बीमारी क्यों नहीं हो रही, इसका प्रमुख कारण यह है कि जो व्यक्ति कुपोषण की जद में है उसी में सक्रिय टीबी होने की संभावना ज्यादा रहती है। इस प्रकार कह सकते हैं कि टीबी का मरीज होने के लिए बैक्टीरिया ही जिम्मेदार नहीं है, अगर व्यक्ति का पोषण और प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो टीबी का संक्रमण होने के बावजूद उसे सक्रिय टीबी की बीमारी नहीं होगी।

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