‘मौत’ से आंख मिचोली खेलना खतरनाक

इटावा में हुई घटना यात्रियों के ओवर स्मार्टनेस की वजह से ही हुई। जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी तो जनरल डिब्बे में बैठे कुछ लोग अपनी-अपनी जगह छोडक़र ट्रेन से नीचे उतर आये। इन लोगों ने प्लेटफार्म पर खड़े होकर ट्रेन खुलने का इंतजार करने के बजाय रेल की पटरी पर खड़े होने का मूड बनाया और फिर आपस में खड़े होकर बातचीत करने लगे। इसी बीच ट्रेन की चपेट में आ गये। जब तक हंगामा मचता और ट्रेन को रोका जाता। चार लोगों की मौत हो चुकी थी।

SAnjay Sharma

जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु है। इस बात को हर कोई भली-भांति जानता है। हर व्यक्ति दुनिया में ज्यादा समय तक जिन्दा रहने और खूबसूरत दुनिया का आनंद लेने की ख्वाहिश रखता है, लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जो खुद को सबसे अलग साबित करने के चक्कर में मौत के साथ खेल खेलने लगते हैं। ऐसे लोगों के लिए मौत से आंख-मिचोली का खेल खेलना अक्सर खतरनाक साबित हो जाता है। ऐसा ही कुछ इटावा में उस वक्त हुआ जब राजधानी एक्सप्रेस के जनरल डिब्बे से यात्रा करने वाले कुछ लोग बरलई रेलवे स्टेशन के लूप लाइन पर रोककर कानपुर की ओर से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गये। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। दस से अधिक लोग घायल हो गये। इस हादसे की वजह यात्रियों का प्लेटफार्म की जगह रेलवे पटरी पर खड़े होकर टाइम पास करना था। जो हादसे की असली वजह बना।
दरअसल, आधुनिक युग में लोगों की धारणा काफी तेजी से बदलती जा रही है। जो इंसान पहले ट्रेन और बस में बैठने से डरता था। वह ट्रेन, बस और हवाई जहाज में बैठकर देश और दुुनिया के कोने-कोने की सैर कर रहा है। आवागमन के इन साधनों के साथ उसका रिश्ता सा जुड़ गया है। जिसकी वजह से ट्रेन, बस और हवाई जहाज को देखकर कोई डरता नहीं है। इंसान की यही प्रवृत्ति और खुद को ओवर स्मार्ट दिखाने की भूल मौत की वजह बनती जा रही है। इटावा में हुई घटना यात्रियों के ओवर स्मार्टनेस की वजह से ही हुई। जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी तो जनरल डिब्बे में बैठे कुछ लोग अपनी-अपनी जगह छोडक़र ट्रेन से नीचे उतर आये। इन लोगों ने प्लेटफार्म पर खड़े होकर ट्रेन खुलने का इंतजार करने के बजाय रेल की पटरी पर खड़े होने का मूड बनाया और फिर आपस में खड़े होकर बातचीत करने लगे। इसी बीच ट्रेन की चपेट में आ गये। जब तक हंगामा मचता और ट्रेन को रोका जाता। चार लोगों की मौत हो चुकी थी। दस से अधिक घायल हो गये थे। इसमें सबसे पहली गलती ट्रेन के डिब्बे से उतरकर रेल की पटरी पर खड़े होने वालों की थी। जो लोग बच गये वे शायद ही जीवन में कभी ऐसी गलती करें। लेकिन हमें भी ध्यान देना होगा कि हम ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।
सवाल उठता है कि जिस वक्त हादसा हुआ जीआरपी और आरपीएफ के लोग कहां थे? ट्रेन को आता हुआ देखने के बाद भी स्टेशन पर खड़े अन्य लोगों ने उन्हें सचेत क्यों नहीं किया ? ट्रेन के ड्राइवर और अन्य स्टाफ ने सामने देखने और रास्ता क्लीयर होने की पुष्टि क्यों नहीं की? यदि समय रहते यात्रियों को सचेत कर दिया गया होता तो उनकी जान बच सकती थी। इस मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी ऐसी घटनाओं पर रोक लग पायेगी।

 

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