यूपी पुलिस पर सुप्रीम आदेश, पत्रकार प्रशांत को तुरंत रिहा करने के दिए आदेश

  • एससी ने कहा हम ट्वीट पर नहीं दे रहे आदेश, पर इस तरह की गिरफ्तारी गलत
  • सीएम की निगाहों में आने के लिए पूरे देश में किरकिरी करा दी लखनऊ पुलिस ने
  • एक आपत्तिजनक ट्वीट पर गिरफ्तारी के बाद हजारों लोगों ने किया उसे रीट्वीट और कहा हमको भी करो गिरफ्तार
  • ट्वीट की भाषा थी आपत्तिजनक, मगर पुलिस के अति उतावलेपन ने सरकार को डाला असहज स्थिति में
  • अफसरों की इसी चमचागिरी से होता है सरकार की साख पर सवाल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। दिल्ली के एक पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया का ट्वीट। ट्वीट की भाषा भी ऐसी जिसे कोई स्वीकार नहीं करता। मगर सीएम की निगाह में अपने नंबर बढ़ाने के लिए लखनऊ पुलिस ने वो कर डाला, जिससे पूरे देश में सरकार की किरकिरी हुई। आनन-फानन में गिरफ्तार किए गए प्रशांत को तत्काल रिहा करने के आदेश देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने पुलिस को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डीजीपी कार्यालय को सांप सूंघ गया है और वह इस मामले में बोलने को तैयार नहीं है।
दरअसल एक महिला ने सीएम आवास के निकट सीएम योगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसको इलेक्ट्रानिक मीडिया ने कवर किया था। मगर वीडियो देखकर सभी समझ गये थे कि इस लडक़ी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। एक संत पर इस तरह की बातें किसी को भी हजम नहीं हो रही थी लिहाजा किसी ने इस पर ध्यान भी नहीं दिया। सभी जानते थे कि इस महिला के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं हो सकती। मगर तब सवाल उठा कि सीएम आवास पर यह महिला खुलेआम इस तरह के बयान देती रही और लखनऊ पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। बताया जाता है कि लखनऊ पुलिस के इस रवैये पर आला अफसर बहुत नाराज भी हुए क्योंकि मामला सीएम आवास के निकट का था।
इस बीच इंडियन एक्सप्रेस और कई अन्य मीडिया संस्थानों में काम कर चुके दिल्ली के पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया ने इस वीडियो को अटैच करते हुए एक ट्वीट कर दिया। प्रशांत ट्विटर पर बहुत खास प्रदर्शन भी नहीं करते। इस ट्वीट को करते समय उनके ट्विटर पर लगभग 6 हजार फॉलोअर थे। उनके हर ट्वीट को औसत 6 से 8 लोगों ने ही रिट्वीट किया था। इस आधार पर माना जा सकता है कि वे ट्विटर की दुनिया में कोई बहुत बड़ा नाम नहीं थे। उनके सीएम योगी पर किए गए आपत्तिजनक ट्वीट को भी किसी ने ज्यादा तव्वजो नहीं दी।
मगर अपनी लापरवाही से डांट खा चुकी लखनऊ पुलिस को लगा कि वह थोड़ा कानून को ताक पर रख ले तो सीएम की निगाह में उसके नंबर बढ़ जायेंगे। आनन-फानन में पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची और प्रशांत को गिरफ्तार कर लिया। लखनऊ पुलिस की इस एक चूक ने प्रशांत को रातों-रात स्टार बना दिया। जिस प्रशांत के दर्जन भर ट्वीट रिट्वीट नहीं होते थे उसकी गिरफ्तारी जिस ट्वीट के कारण हुई उसको चार हजार से ज्यादा लोगों ने रिट्वीट करके उसे स्टार बना दिया। पुलिस की इस अवैध गिरफ्तारी का विरोध करते हुए सैकड़ों लोगों ने लिखा कि हम भी इसे रिट्वीट कर रहे हैं, हमको भी गिरफ्तार करो। प्रशांत के जिस ट्वीट का समर्थन दर्जन भर लोग भी नहीं कर रहे थे उसकी गिरफ्तारी का विरोध पूरी दुनिया में होने लगा। विदेशों में भी इस गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बताया जाने लगा।
प्रशांत कन्नौजिया की पत्नी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और फिर यूपी पुलिस की कारगुजारियों पर फटकार लगाते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने प्रशांत को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए। इस विषय में बोलने को डीजीपी कार्यालय से कोई तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम पत्रकार के ट्वीट की सहारना नहीं करते मगर नागरिक की स्वतंत्रता संविधान की ओर से दिया गया मौलिक अधिकार है। इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। सर्वोच्च अदालत ने कहा यह हत्या का मामला नहीं है। एक ट्वीट के लिए किसी को 11 दिन तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वे इस संबंध में दायर केस को बंद करने के आदेश नहीं दे रहे हैं।

लोकसभा: डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक बने प्रोटेम स्पीकर

  • 17 जून से शुरू होगा सदन का पहला सत्र

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केंद्र में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। सरकार ने आज बीजेपी सांसद डॉ. वीरेंद्र कुमार खटिक को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार सभी सांसदों को शपथ दिलाएंगे।
संसद पहुंचे नए सांसदों का शपथ ग्रहण प्रोटेम स्पीकर की ओर से करवाया जाएगा। संसद के निचले सदन में एक अस्थायी स्पीकर को लोकसभा में निर्वाचित होने के वरिष्ठता के आधार पर नियुक्त किया जाता है। इसके लिए सरकार ने वीरेंद्र कुमार को नियुक्त किया है। गौरतलब है कि लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से शुरू होगा। पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली नई सरकार अपना पहला बजट पांच जुलाई को संसद में पेश करेगी।

प्रदेश सरकार ने पीजीआई के डॉक्टरों की एज लिमिट बढ़ाई

  • 35 की जगह अब 37 साल की उम्र में होगी भर्ती
  • कहा, 2020 में पूरा हो जाएगा रायबरेली में एम्स का निर्माण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
़लखनऊ। प्रदेश सरकार की कैबिनेट में पीजीआई के डॉक्टरों के भर्ती की एज लिमिट दो साल बढ़ाने, रायबरेली में एम्स का निर्माण 2020 तक पूरा करने, बुजुर्गों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन में 100 रुपये का इजाफा समेत कई प्रस्तावों को पास कर दिया गया। इस कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता सीएम योगी आदित्यनाथ ने की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में कोई भी बाधा नहीं आनी चाहिए। सरकार सबके लिए बेहतर काम करेगी।
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि आज पीजीआई के डॉक्टरों के भर्ती की एज लिमिट दो साल बढ़ा दी गई है। अब 35 से 37 साल में भर्ती हो सकेगी। प्रदेश में लघु माइक्रो ग्रेवी की स्थापना हेतु नियमावली 1961 में छठां संशोधन किया गया है। इसमें लाइसेंस फीस बढ़ाकर ढाई लाख की गई है। वृद्धावस्था पेंशन 400 से बढ़ाकर 500 रुपये की गई है। रायबरेली में चल रहा एम्स का निर्माण 2020 तक पूरा करने और उसके निर्माण में बाधक बन रहे 76 आवासों को ध्वस्त करने का निर्णय भी लिया गया है।

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