प्रदेश के चार बड़े शहरों में दुरूस्त होगा सीवरेज सिस्टम निजी एजेंसी को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

  • लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा व गोरखपुर में एक विदेशी कंपनी करेगी काम
  • ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ की तर्ज पर होगा काम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चार बड़े शहरों लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा व गोरखपुर में सीवर सिस्टम में सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए अब जल निगम की जगह निजी एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। सीवर सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम निजी कंपनी को सौंपने के साथ ही उसकी जिम्मेदारी भी तय हो जाएगी। निजी एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जिसके तहत एक विदेशी कंपनी का नाम भी तय किया जा चुका था। अब जल्द ही निजी कंपनी काम संभाल लेगी।
प्रदेश सरकार ने पहले चरण में कंपनी के साथ 10 साल का करार करने का निर्णय लिया है। इसके लिए नई योजना ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ का एनजीटी के सामने प्रजेंटेशन भी हो चुका है। जिसमें कंपनी की तरफ से सीवर सिस्टम और सीवरेज प्लांट को लेकर क्या-क्या किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर प्लांट में क्या-क्या मशीनरी लगाई जाएंगी, इन सबका विवरण प्रस्तुत किया गया था। शहरों में सीवर सफाई और सीवर लाइन के मेंटीनेंस का काम जलकल विभाग तो एसटीपी का संचालन जल निगम करता है। सीवेज पंपिंग स्टेशनों का संचालन अलग-अलग ठेकेदार करते हैं। शासन के अफसरो के मुताबिक ऐसे में कोई गड़बड़ी आने पर सब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगते हैं। ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ के लिए राज्य स्तरीय फंड बनाया जाएगा। सभी निकायों से इसके लिए पैसा लिया जाएगा। उसी फंड से निजी कंपनी को भुगतान किया जाएगा। इस व्यवस्था से निकायों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।

गोमती नदी में प्रदूषण पर लगेगी लगाम

गोमती नदी में नालों व सीवर का गंदा पानी गिरने के कारण बढ़ रहे प्रदूषण को अब ‘वन सिटी, वन ऑपरेटर’ योजना के जरिये रोका जाएगा। इसका खाका भी तैयार कर लिया गया है। गोमती नदी के साफ होने का फायदा जौनपुर की जनता को भी मिलेगा। वहां पर साफ पानी पहुंचेगा। गोरखपुर, आगरा व गाजियाबाद में नदियों के साफ होने से आसपास के जिलों को भी काफी लाभ होगा। शासन के अफसरों का कहना है, ‘वन सिटी वन ऑपरेटर’ के तहत निजी कंपनी को एसटीपी समेत पूरा सीवर सिस्टम रखरखाव के लिए दिया जाएगा। इसके लिए कई कंपनियां आगे आई हैं। इनमें से एक कंपनी का चयन कर आम चुनाव के बाद काम सौंपने का निर्णय लिया गया था। अब चुनाव समाप्त हो चुका है। आचार संहिता भी समाप्त हो गई है। सरकारी मशीनरी एक बार फिर अपने-अपने काम में जुट गई है। ऐसे में जनता के मन में भी नई आशाएं और  उम्मीदें जगी हैं। नई योजना से गोमती सहित अन्य नदियां स्वच्छ होंगी।

घटकर 40 करोड़ रुपये हो जाएगा खर्च

लखनऊ। (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क) लखनऊ नगर निगम को एसटीपी संचालन पर सालाना करीब 125 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था और प्रदूषण का हाल बुरा है। लेकिन नई व्यवस्था में काफी कुछ सुधार होने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो नई व्यवस्था में एसटीपी संचालन पर सालाना खर्च होने वाली राशि 125 करोड़ से घटकर 40 करोड़ रुपये हो जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अभी तक कुल 99 एसटीपी हैं। जबकि 58 नए एसटीपी लगाए जाने हैं। इसलिए आने वाले समय में हमें उसके बेहतर रिजल्ट मिलने की उम्मीद है।

 

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