पौधे लगाएं ही नहीं उन्हें सुरक्षित भी रखें

मेरा मानना है कि सिर्फ पौधे लगाने भर से हम पर्यावरण को संरक्षित नहीं कर पायेंगे। पौधे लगाने के साथ ही हमारी और आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। हमने जो भी पेड़ लगाए हैं, वे सुरक्षित भी रहें। इसके लिए पेड़ों में पानी देने से लेकर देखभाल करने तक की जिम्मेदारी हमारी होनी चाहिए।

Sanjay Sharma

गर्मी का महीने आते ही चारों ओर पानी के लिए हाहाकार मचने लगता है। सरकार, प्रशासन और आम आदमी जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की बातें करने लगता है। तालाबों की खोदाई, कुओं की सफाई और जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू हो जाती है, लेकिन गर्मी का मौसम खत्म होते ही हम सब कुछ भूल कर बैठ जाते हैं। हमारे चारों तरफ पेड़ों की कटाई, कंक्रीट से घरों और सडक़ों का निर्माण, तालाबों को पाटकर बहुमंजिला इमारतें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने का काम चलता रहता है। इस काम में कहीं न कहीं प्रशासनिक अधिकारियों व संबंधित विभाग के जिम्मेदारों का मौन समर्थन होता है। जिसकी वजह से अवैध काम धड़ल्ले से होते रहते हैं। जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक साबित हो रहे हैं। देश के कई हिस्सों में रहने वाले लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने लगे हैं। हमें खुद को इस स्थिति से उबारना होगा, लेकिन उसके लिए योजना बनाकर दृढ़ता से काम करना होगा। सिर्फ प्लानिंग करने से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वर्तमान वित्तीय वर्ष में 26 लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हाल ही में विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेश भर में लाखों पौधे लगाये गये। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रमुख सचिव, कमिश्नर और डीएम समेत लगभग सभी लोगों ने पौधे लगाये और लोगों से पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। लेकिन मेरा मानना है कि सिर्फ पौधे लगाने भर से हम पर्यावरण को संरक्षित नहीं कर पायेंगे। पौधे लगाने के साथ ही हमारी और आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। हमने जो भी पेड़ लगाए हैं, वे सुरक्षित भी रहें। इसके लिए सारे पेड़ों में पानी देने से लेकर देखभाल करने तक की जिम्मेदारी हमारी होनी चाहिए। हम अपने शहर में जल स्तर नीचे चले जाने को लेकर परेशान हैं, भविष्य में पानी की किल्लत के बारे में सोच कर परेशान हैं, लेकिन जल संरक्षण और जल स्त्रोतों को बचाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। समाज में बहुत ही कम लोग होंगे जिन्होंने पारम्परिक जल स्त्रोतों कुआं, तालाब, बउली पर अतिक्रमण और उनको पाटे जाने जाने का विरोध किया है। लेकिन आज भयंकर गर्मी और उमस से परेशान होने की वजह से पेड़ लगाने और जल स्त्रोतों को बचाने की बातें कर रहे हैं।
यदि हम सचमुच अपने वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं तो समस्त भौतिक सुख-सुविधाओं को त्याग कर हमें प्रकृति प्रेमी बनना होगा। पारम्परिक जल स्त्रोतों को बचाना होगा। तभी हम अपने बच्चों को बेहतर कल दे सकते हैं।

 

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