हिंसक होता समाज और नई चुनौतियां

सवाल उठता है कि हम किस समाज में रह रहे हैं? हम ऐसा समाज बना रहे हैं, जिसमें किसी की खुशियों, इज्जत और जिंदगी को बचाने से ज्यादा हमें अपनी पोस्ट पर आने वाले लाइक्स और कमेंट की चिंता रहती है। हम दुनिया भर के बच्चों को नसीहतें देते हैं, लेकिन अपने बच्चों को नसीहत देना भूल जाते हैं।

Sanjay Sharma

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने हर मां-बाप को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के खिलाफ देश भर से आवाज उठी है। हर व्यक्ति ऐसे बहशी, दरिंदों को सार्वजनिक तौर पर फांसी देने की वकालत कर रहा है। इससे पूर्व भी सैकड़ों ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनके होने के बाद समाज में बदलाव की उम्मीद जगी थी लेकिन वह उम्मीद रोजाना दम तोड़ती नजर आती है। हम किसी भी गली, मोहल्ले, बस स्टैंड, मेट्रो और ट्रेन में खड़े होकर किसी न किसी की बेटी, बहन, पत्नी और मां के प्रति बुरी नजर रखने वालों को आसानी से देख सकते हैं। ऐसे लोगों को टोकने और उनके खिलाफ एकजुट होकर सबक सिखाने के बारे में हम बिल्कुल भी नहीं सोचते। समाज में रहने वाले लोगों की यही मानसिकता उन चंद मुट्ठी भर गंदी मानसिकता के लोगों को अपनी मनमानी करने की छूट देती है, जो हमारी चुप्पी का लाभ उठाकर किसी को छेडऩे और उसके साथ गंदी हरकतें करने को गलत नहीं समझते हैं।
मासूम बच्ची की मौत पर राजनेता, खिलाड़ी, फिल्मी हस्तियों के साथ-साथ तमाम स्वयंसेवी संगठनों ने भी विरोध के स्वर बुलंद किए हैं। मोमबत्ती गैंग भी अचानक से सक्रिय हो गया है, लेकिन ऐसा करने वाले लोग चंद दिनों बाद सब कुछ भूल जाएंगे। वे दोबारा छेड़छाड़ और रेप जैसी घटनाएं होती देखेंगे तो सबसे पहले खड़े होकर वीडियो बनाएंगे, इसके बाद उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर लोगों के लाइक और कमेंट्स आने का इंतजार करेंगे। अपनी भड़ास सोशल मीडिया पर निकालकर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेगें।
सवाल उठता है कि हम किस समाज में रह रहे हैं? हम ऐसा समाज बना रहे हैं, जिसमें किसी की खुशियों, इज्जत और जिंदगी को बचाने से ज्यादा हमें अपनी पोस्ट पर आने वाले लाइक्स और कमेंट की चिंता रहती है। हम दुनिया भर के बच्चों को नसीहतें देते हैं, लेकिन अपने बच्चों को नसीहत देना भूल जाते हैं। यदि हम अपने बच्चों को सही नसीहत दें। उन्हें सबकी इज्जत और सम्मान करना सिखाएं तो न ही किसी बेटी की इज्जत लुटेगी और न ही कोई मां-बाप बृद्घाश्रम में रहेंगे। इसलिए हर मां-बाप प्रण लें कि हम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा से पहले अच्छे संस्कार देंगे। हम जहां भी रहेंगे, अपने आस-पास कुछ भी गलत होता हुआ देखेंगे तो उसका मजबूती से विरोध करेंगे। जब ऐसा होने लगेगा तो अपने आप समस्या का समाधान हो जाएगा।

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