जन प्रतिनिधियों के गलत आचरण पर रोक जरूरी

देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि जनता और जनप्रतिनिधि समाज को किस ओर ले जा रहे हैं। जिन जनप्रतिनिधियों को अपने कर्म और आचरण से जनता के सामने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए वे खुद के गंदे आचरण से पूरी नेता बिरादरी को बदनाम कर रहे हैं।

Sanjay Sharma

देश के अलग-अलग हिस्सों से आजकल ऐसी खबरें आ रही हैं, जिन्हें सुनकर एक बारगी यकीन ही नहीं होता कि ऐसा भी हुआ होगा, लेकिन जब घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाती है तो दिल और दिमाग दोनों ही काम करना बंद कर देता है। देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति हमें सोचने पर मजबूर कर रही है कि जनता और जनप्रतिनिधि समाज को किस ओर ले जा रहे हैं। जिन जनप्रतिनिधियों को अपने कर्म और आचरण से जनता के सामने एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए वे खुद के गंदे आचरण से पूरी नेता बिरादरी को बदनाम कर रहे हैं। ताजा मामला गुजरात का है, जहां सत्ताधारी पार्टी भाजपा के विधायक बलराम थवानी ने पानी की समस्या लेकर पहुंची एनसीपी की महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट की। उसे बीच सडक़ पर बुरी तरह पीटा। जब महिला का पति उसको बचाने दौड़ा तो उसे भी विधायक और उनके समर्थकों ने बुरी तरह पीटा। घटना का वीडियो वायरल हुआ और विधायक की करतूत सबके सामने आई तो उन्होंने न सिर्फ महिला से माफी मांगी बल्कि उससे मिलकर राखी भी बंधवाई। भाजपा विधायक का कहना है कि मैं भावनाओं में बह गया था। यह सब जानबूझकर नहीं किया। मैं पिछले 22 सालों से राजनीति में हूं, ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के संतकबीर नगर जिले में कुछ महीने पूर्व सरकारी मीटिंग के दौरान बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश बघेल आपस में भिड़ गए। मीटिंग के दौरान कहासुनी होने पर जब विधायक राकेश ने जूता दिखाने की कोशिश की तो बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी ने फुर्ती दिखाते हुए ताबड़तोड़ विधायक की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद दोनों नेताओं के समर्थकों ने भी मारपीट हुई। इसके अलावा कई न्यूज चैनलों की डिबेट में भी राजनीतिक दलों के प्रवक्ता आपस में भिड़ते नजर आते रहते हैं।
सवाल उठता है कि स्वामी विवेकानंद, चाणक्य, रविन्द्रनाथ टैगोर और मोहनदास करमचंद गांधी की धरती पर वाणी और कर्म से गंदा आचरण करने वाले लोगों की खेप कहां से उत्पन्न हो रही है? संसद के अंदर कुर्सियां चलाने वाले नेताओं की लड़ाई अब सडक़ों पर दिखना क्या चिंता की बात नहीं है ? हम नई पीढ़ी और समाज को आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं ? ध्यान रहे, संपूर्ण विश्व का नेतृत्व करने की इच्छा पालने वालों को सबसे पहले अपने आचरण में सुधार लाना होगा। इसकी पहल जनप्रतिनिधियों और जनता दोनों को करनी होगी। यदि ऐसा हुआ तो हम निश्चित तौर पर विश्व का नेतृत्व करने लायक बन जाएंगे।

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