साइबर क्राइम और पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? पुलिस अपराधियों के सामने पस्त क्यों हो जाती है? साइबर सेल क्या कर रहा है? क्या हाईटेक अपराधियों से निपटने में पुलिस सक्षम नहीं है? क्या कमजोर खुफिया तंत्र के कारण ऐसे अपराधियों का सुराग नहीं लग पा रहा है? क्या सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है?

Sanjay Shamra

उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है। आए दिन ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। ये जालसाज फोन और वेबसाइट के जरिए लोगों को झांसे में लेकर उनके खाते से पलक झपकते रुपये उड़ा देते हैं। वे एटीएम का क्लोन तैयार कर लोगों को चपत लगा रहे हैं। ये ठगी का नया-नया तरीका अपनाते रहते हैं। बावजूद इसके पुलिस ऐसे अपराधियों पर नकेल नहीं कस पा रही है। सवाल यह है कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? पुलिस अपराधियों के सामने पस्त क्यों हो जाती है? साइबर सेल क्या कर रहा है? क्या हाईटेक अपराधियों से निपटने में पुलिस सक्षम नहीं है? क्या कमजोर खुफिया तंत्र के कारण ऐसे अपराधियों का सुराग नहीं लग पा रहा है? क्या सरकार इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है?
इंटरनेट और स्मार्ट फोन के विकास ने एक ओर सूचना के क्षेत्र में नयी क्रांति ला दी तो दूसरी ओर एक नए तरह के अपराध को भी जन्म दिया। नए सूचना माध्यमों के जरिए अपराधियों की पहुंच घर तक हो गई है। ये साइबर अपराधी पलक झपकते ही न केवल लोगों के फोन से निजी जानकारियां चुरा लेते हैं बल्कि उनके बैंक खातों तक पहुंच जाते हैं। साइबर अपराधी दुनिया के किसी कोने में बैठकर किसी को भी अपना शिकार बना लेते हैं। ये स्थानीय और विदेशी दोनों तरह के हैं। स्थानीय स्तर पर अपराधी एटीएम का क्लोन तैयार कर लोगों के खातों से पैसे उड़ा लेते हैं। ये निजी जानकारियों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करते हैं। साइबर अपराधियों का जाल इतना अधिक फैला हुआ है कि असली और नकली वेबसाइट की पहचान करना आम आदमी के लिए मुश्किल है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के तमाम शहरों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। हैरानी की बात यह है कि कई साइबर अपराधी विदेश से आकर यहां अपना गैंग संचालित कर रहे हैं। पिछले दिनों एक विदेशी गैंग को पकड़ा जा चुका है। वहीं देश से बाहर बैठे साइबर अपराधी वेबसाइट के जरिए लोगों को ठग रहे हैं। पीडि़त को न तो अपराधी का असली नाम पता होता है न वह उसकी पहचान कर सकता है। ऐसे में अपराधी तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं होता है। इसके अलावा ये अपराधी तकनीकी में दक्ष होते हैं और पुलिस के पास इन अपराधियों तक पहुंचने के लिए दक्ष लोगों की कमी है। यदि सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण करना चाहती है तो उसे न केवल खुफिया तंत्र को मजबूत करना होगा बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती करनी होगी। वहीं लोगों को साइबर ठगी से सतर्क रहने के लिए लगातार जागरूकता अभियान भी चलाना होगा।

 

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