बिम्सटेक देशों को न्योता देने का अर्थ

सवाल यह है कि बिम्सटेक के राष्टï्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण में बुलाने का निहितार्थ क्या है? क्या इसके जरिए भारत पड़ोसी प्रथम की नीति का संदेश दुनिया को देना चाहता है? क्या भारत सार्क संगठन को नजरअंदाज कर इसके द्वारा दक्षिण एशियाई देशों से अपने संबंध प्रगाढ़ करने की नीति पर चल रहा है? क्या बिम्सटेक देशों के सहयोग से भारत बंगाल की खाड़ी के व्यापार को मजबूती देना चाहता है?

Sanjay Sharma

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत के लिए बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कॉरपोरेशन) के राष्टï्राध्यक्षों को न्योता भेजा गया है। बिम्सटेक में शामिल सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस समारोह में शामिल होंगे। इस संगठन में भारत सहित नेपाल, भूटान, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। सवाल यह है कि बिम्सटेक के राष्टï्राध्यक्षों को शपथ ग्रहण में बुलाने का निहितार्थ क्या है? क्या इसके जरिए भारत पड़ोसी प्रथम की नीति का संदेश दुनिया को देना चाहता है? क्या भारत सार्क संगठन को नजरअंदाज कर इसके द्वारा दक्षिण एशियाई देशों से अपने संबंध प्रगाढ़ करने की नीति पर चल रहा है? क्या बिम्सटेक देशों के सहयोग से भारत बंगाल की खाड़ी के व्यापार को मजबूती देना चाहता है? क्या यह नीति भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे सकेगी? क्या इनके जरिए भारत, चीन और पाकिस्तान पर दबाब बनाना चाहता है?
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क में पाकिस्तान के नकारात्मक रवैए के कारण एक अधिक सहयोगात्मक क्षेत्रीय संगठन की जरूरत महसूस की गई । लिहाजा बिम्सटेक की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकाक घोषणा के द्वारा की गई। बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के सात देशों के लगभग 1.5 अरब लोगों की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला समूह है जो करीब 22 फीसदी वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। इसका गठन व्यापार, ऊर्जा, पर्यटन, परिवहन, प्रौद्योगिकी, कृषि, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद, स्वास्थ्य, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर आपसी सहयोग के लिए किया गया था। यह संगठन भारतीय व्यापार के लिए अहम है क्योंकि म्यांमार और थाईलैंड भारत को दक्षिण पूर्वी इलाकों से जोड़ते हैं। संगठन के देश बंगाल की खाड़ी से जुड़े हैं। बंगाल की खाड़ी भारत के लिए न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक दृष्टिï से भी अहम है। ये देश दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी देशों के बीच सेतु का काम करते हैं। भारत इन देशों से मधुर संबंध स्थापित कर पाकिस्तान व चीन पर कूटनीतिक, सामरिक और आर्थिक दबाव भी बनाए रखना चाहता है। इन देशों में भारत निर्यात और निवेश के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को आसानी से रफ्तार दे सकता है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को आसानी से धार दे सकता है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों से भारत लगातार पड़ोसी प्रथम की नीति पर जोर दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में इन देशों के राष्टï्राध्यक्षों को निमंत्रण भेजना भारत की इसी नीति का प्रतिफल है।

 

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