ईवीएम पर संदेह के निहितार्थ

सवाल यह है कि दल बार-बार ईवीएम के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रहे हैं? क्या दलों को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है? क्या चुनावों के बाद हर बार ईवीएम का मुद्दा उठाना जनादेश का अपमान नहीं है? क्या इसकी आड़ में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की सियासत की जा रही है? इस प्रकार के दांव-पेंच से सियासी दल क्या साबित करना चाहते हैं?

Sanjay Sharma

लोक सभा चुनाव नतीजों से पहले ईवीएम पर फिर घमासान शुरू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक का दरवाजा खटखटाया जा रहा है। कोर्ट ने सौ फीसदी ईवीएम मशीनों का मिलान वीवीपैट से कराने की मांग वाली याचिका को बकवास बताते हुए खारिज कर दिया जबकि आयोग ने दलों को आश्वस्त किया है कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है। बावजूद इसके सियासी दल इस मुद्दे को गरमा रहे हैं। सवाल यह है कि दल बार-बार ईवीएम के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रहे हैं? क्या दलों को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है? क्या चुनावों के बाद हर बार ईवीएम का मुद्दा उठाना जनादेश का अपमान नहीं है? क्या इसकी आड़ में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की सियासत की जा रही है? इस प्रकार के दांव-पेंच से सियासी दल क्या साबित करना चाहते हैं? क्या चुनाव आयोग दलों की शंका का समाधान करने में विफल है या कुछ और बात है?
पिछले पांच सालों से हर चुनाव के बाद ईवीएम का मुद्दा उठता रहा है। सियासी दलों ने सबसे पहले ईवीएम के हैक होने का सवाल उठाया और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। इस पर जब आयोग ने ईवीएम को हैक करने की चुनौती दी तो किसी भी दल ने इसे स्वीकार नहीं किया। हैरानी की बात यह है कि वही सियासी दल जब चुनाव जीत जाते हैं तो ईवीएम पर सवाल नहीं उठाते हैं। लोक सभा चुनाव होने से पहले सियासी दलों ने ईवीएम-वीवीपैट से चुनाव कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की। कोर्ट ने अपने फैसले में चुनाव आयोग को मतगणना के दिन हर विधानसभा के पांच मतदान केंद्रों के ईवीएम और वीवीपैट का मिलान करने का निर्देश दिया है। बावजूद इसके ईवीएम को लेकर दल आयोग को निशाने पर ले रहे हैं। यह स्थिति लोकतांत्रिक प्रणाली में उचित नहीं है। दलों द्वारा अपने राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। क्या ईवीएम पर सवाल उठाने वाले दल यह मानकर चल रहे हैं कि जनादेश उनको ही मिलना चाहिए उनके विरोधी को नहीं और यदि मिलता है तो ईवीएम में गड़बड़ी की गई है? किसी भी देश की जनता अपने हितों को ध्यान में रखकर अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। यही वजह है कि सरकारें बदलती रहती हैं। हां, यदि ईवीएम में गड़बड़ी है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसके लिए दलों को आयोग के सामने सबूत पेश करना चाहिए। दूसरी ओर चुनाव आयोग को भी निष्पक्ष चुनाव और उसके परिणामों को लेकर दलों को आश्वस्त करना चाहिए। उनकी शंका का समाधान करना चाहिए ताकि लोकतंत्र की साख और चुनावी पारदर्शिता बरकरार रहे।

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