डेंगू से निपटने को तैयार स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटा

  • डॉक्टरों की तैनाती और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के आदेश
  • सर्विलांस लैब सक्रिय, स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त होगी डेंगू मरीजों की जांच
  • प्रदेश में अब तक 43 मरीजों की जांच रिपोर्ट मिली पॉजिटिव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी में डेंगू से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। सभी अस्पतालों को व्यवस्था दुरुस्त करने, चिकित्सकों की तैनाती और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जांच के लिए सर्विलांस लैब को भी सक्रिय कर दिया गया है। साथ ही सभी केंद्रों में संदिग्ध डेंगू मरीजों की जांच मुफ्त में की जाएगी। अभी तक प्रदेश में करीब 43 मरीजों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है।
पिछले साल की घटनाओं से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम के लिए कमर कस ली है। गत वर्ष डेंगू से कई मरीजों की मौत हुई और काफी लोग रोग की चपेट में आ गए थे। विभाग ने सभी अस्पतालों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अस्पतालों से कहा गया कि वे फीवर डेस्क पर मलेरिया के साथ डेंगू बुखार से पीडि़त मरीजों के इलाज का बंदोबस्त रखे। इसके साथ ही स्थितियों को देखते हुए अलग वार्ड बनाने की तैयारी की जा रही है। निदेशक संचारी रोग, डॉ. मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि इस वर्ष अब तक प्रदेश में एक जनवरी से 15 मई तक कुल 1577 डेंगू के संभावित रोगियों की जांच की गयी थी। इसमें से कुल 43 रोगियों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव मिली है। गत वर्ष 15 मई तक कुल 99 मामले पॉजिटिव आए थे। अभी तक प्रदेश में एक भी रोगी की मृत्यु डेंगू से नहीं हुयी है। यही नहीं डेंगू की जांच के लिए सभी 46 सर्विलान्स लैब क्रियाशील कर दी गई हैं जबकि गत वर्ष 37 लैब क्रियाशील थीं। इसको देखते हुए राजधानी के तमाम अस्पतालों को रोग से निपटने के लिए सारे बंदोबस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा राजधानी में डेंगू जांच की मुफ्त सुविधा एसजीपीजीआई, केजीएमयू तथा डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में की गई है। डेंगू रोगी के इलाज की व्यवस्था समस्त राजकीय स्वास्थ्य केन्द्रों में मुफ्त में होगी।

लक्षण
डेंगू के शुरुआती लक्षणों में रोगी को तेज ठंड लगती है, सिरदर्द, कमरदर्द और आंखों में तेज दर्द हो सकता है। इसके साथ ही उसे लगातार तेज बुखार रहता है। इसके अलावा, जोड़ों में दर्द, बेचैनी, उल्टियां, लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इन लक्षणों को पहचानकर व्यक्ति बिना देरी के चिकित्सक से मिले और इसका उपचार करवाए। इस दौरान अधिक से अधिक पानी पीने के साथ पूरा आराम करना जरूरी है।

इलाज में देरी खतरनाक
डेंगू के उपचार में अगर अधिक देरी हो जाए तो यह डेंगू हेमोरेजिक फीवर (डीएचएफ) का रूप ले लेता है जो अधिक भयावह हो सकता है। डीएचएफ की आशंका दस साल से कम उम्र के बच्चों में सबसे ज्यादा होती है जिसमें उन्हें तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग और शॉक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

डेंगू से बचाव

डेंगू का वायरस मच्छरों द्वारा संक्रमित होता है इसलिए सबसे अधिक जरूरी है कि मच्छरों को घर में बिल्कुल न पैदा होने दें। साफ-सफाई बहुत जरूरी है क्योंकि गंदगी में डेंगू के मच्छरों की आशंका बढ़ जाती है। बाल्टियों व ड्रम में जमा पानी को हमेशा ढंककर रखें और आस-पास के गड्ढे आदि में पानी न जमा होने दें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर को पूरी तरह से ढंके।

डेंगू से निपटने के लिए सभी अस्पतालों को जरूरी व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच लैब सक्रिय हैं। जरूरत पड़ी तो मरीजों के लिए अस्पतालों में अलग वार्ड की व्यवस्था की जाएगी।
-डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

 

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