अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध और भारत

सवाल यह है कि इस व्यापार युद्ध का भारत पर कितना और कैसा असर पड़ेगा? क्या यह भारत के लिए एक अवसर है या इसका नकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेेगा? क्या भारत का निर्यात व्यापार बढ़ेगा? क्या चीन के सामानों के लिए भारत डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा? क्या भारत में होने वाले विदेशी निवेश पर इसका असर पड़ेगा?

Sanjay Sharma

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध चरम पर है। अमेरिका ने चीन के 50 अरब डॉलर की हाईटेक वस्तुओं पर 25 और 200 अरब डॉलर मूल्य की अन्य वस्तुओं पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। अमेरिका ने चीनी मोबाइल कंपनी हुआवे को भी ब्लैक लिस्ट कर दिया है। अब दोनों देश इससे निपटने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं। दोनों देशों के बीच चल रहे इस व्यापार युद्ध का असर भारत पर पडऩा तय है। सवाल यह है कि इस व्यापार युद्ध का भारत पर कितना और कैसा असर पड़ेगा? क्या यह भारत के लिए एक अवसर है या इसका नकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेेगा? क्या भारत का निर्यात व्यापार बढ़ेगा? क्या चीन के सामानों के लिए भारत डंपिंग ग्राउंड बन जाएगा? क्या भारत में होने वाले विदेशी निवेश पर इसका असर पड़ेगा? क्या व्यापार युद्ध से मेकिंग इंडिया अभियान को झटका लगेगा?
अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के पीछे कूटनीतिक और व्यापारिक कारण हैं। ट्रंप ने अमेरिका का राष्टï्रपति बनने के तुरंत बाद अमेरिका फस्र्ट की नीति का ऐलान किया था। अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए संरक्षण नीति शुरू की। इसके तहत ट्रंप ने अमेरिका में आने वाली चीनी वस्तुओं पर टैरिफ मूल्य बढ़ा दिए। इसके बदले चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर टैक्स बढ़ा दिया। यही से व्यापार युद्ध शुरू हो गया। टैरिफ बढ़ाए जाने से चीनी मुद्रा युआन में गिरावट देखने को मिली। इसके चलते भारतीय रुपया सहित अन्य एशियाई मुद्राओं के मूल्य में भी गिरावट आई। अमेरिका का यह फैसला कूटनीतिक भी है। वह आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए चीन की साम्राज्यवादी नीतियों पर अंकुश लगाना चाहता है। फिलहाल दोनों देश इस समस्या का हल भारत में देख रहे हैं। भारत दोनों देशों के लिए बड़ा बाजार साबित हो सकता है। भारत के लिए यह दोनों देशों से निर्यात बढ़ाने का बेहतर मौका है। भारत दोनों देशों में कृषि, वाहन और मशीनरी के क्षेत्र में निर्यात हासिल कर सकता है। इसके अलावा भारत के लिए परिधानों के क्षेत्र में भी अवसर हैं। चीन के बाद दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जहां वैश्विक ग्राहकों को इतने बड़े पैमाने पर आपूर्ति उपलब्ध हो सकती है। चीन में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों के लिए भी भारत मुफीद साबित हो सकता है। चीन अपना सामान को बेचने के लिए भारत की ओर देख रहा है। इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, लौह व रसायन के घरेलू क्षेत्र में मांग-आपूर्ति बिगड़ सकती है। बावजूद इसके यदि भारत बेहतर आर्थिक रणनीति बनाकर इस मौके का उपयोग करेगा तो उसे न केवल दोनों देशों से अच्छा निर्यात बल्कि बड़े विदेशी निवेश का फायदा भी मिल सकेगा।

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