गहराता जल संकट सरकार और सवाल

सवाल यह है कि लगातार बढ़ रहे जल संकट के कारण क्या हैं? क्या अंधाधुंध भूमिगत जल के दोहन के कारण स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं? क्या प्रदूषित होती नदियों ने इस संकट को और बढ़ा दिया है? क्या कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहर इसके लिए जिम्मेदार नहीं हंै? क्या पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने भूमिगत जल स्रोतों को खाली कर दिया है?

Sanjay Sharma

यूपी में जल संकट गहराता जा रहा है। हर वर्ष गर्मियों के मौसम में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। लखनऊ से लेकर प्रदेश के तमाम शहरों में लोग पर्याप्त पानी के तरस जाते हैं। यह हाल रहा तो स्थितियां बेकाबू हो जाएंगी। सवाल यह है कि लगातार बढ़ रहे जल संकट के कारण क्या हैं? क्या अंधाधुंध भूमिगत जल के दोहन के कारण स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं? क्या प्रदूषित होती नदियों ने संकट को और बढ़ा दिया है? क्या कंक्रीट के जंगलों में बदलते शहर इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं? क्या पेड़ों की अंधाधुंध कटाई ने भूमिगत जल स्रोतों को खाली कर दिया है? क्या पानी की बर्बादी ने भी समस्या में इजाफा किया है? क्या नदियों और जलस्रोतों के प्रति सरकार गंभीर नहीं है? क्या इसका असर अन्न के उत्पादन पर नहीं पड़ेगा? क्या जल ही जीवन के आदर्श वाक्य को भारत के जनमानस ने भुला दिया है?
भारत समेत पूरी दुनिया में पानी की कमी बड़ी समस्या बन चुकी है। भारत के 17 राज्यों के 365 जिले पानी संकट से ग्रस्त हैं। उत्तर प्रदेश की भी हालत बहुत अच्छी नहीं है। उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में जल संकट की स्थिति है। बुंदेलखंड सूखे से जूझ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हालत भी खराब हो रही है। यह स्थिति एक दिन में नहीं आई। विकास की अंधी दौड़ ने शहरों को कंक्रीट के जंगल में तब्दील कर दिया। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं सबमर्सिबल पंपों के जरिए भूमिगत जल का जमकर दोहन किया जा रहा है। भूमिगत जल भंडारण की प्रमुख साधन नदियां प्रदूषण के कारण कराह रही है। कई नदियां सूख चुकी हैं और कई समाप्त होने की कगार पर हैं। अधिकांश तालाबों को पाट दिया गया है। लिहाजा हर साल भूमिगत जल कई सेंटीमीटर नीचे जा रहा है। जल संकट को दूर करने के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। न तो नदियों की सफाई पर तेजी से काम हो रहा है न ही उनके तल पर जमे गाद को साफ करने की कोशिश की जा रही है। इसका सीधा असर भूमिगत जल भंडारण की क्षमता पर पड़ रहा है। सरकार भी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। यही नहीं जनता को पानी की बर्बादी के प्रति जागरूक करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। शहरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को भी प्रचारित-प्रसारित नहीं किया जा रहा है। यदि सरकार प्रदेश को जल संकट से उबारना चाहती है तो उसे न केवल वृक्षारोपण की प्रक्रिया को तेज करना होगा बल्कि शहरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य बनना होगा। अन्यथा आने वाली पीढिय़ां बूंद-बूंद पानी को तरस जाएंगी।

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