बढ़ते नक्सली हमले खतरे की घंटी

सवाल यह है कि सुरक्षा कर्मियों पर हमला करने वाले नक्सलियों का खात्मा क्यों नहीं हो पा रहा है? छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्टï्र तक नक्सली हमले अचानक क्यों बढ़ गए हैं? क्या ये हमले नक्सलियों और आतंकियों के गठजोड़ का नतीजा हैं? नक्सलियों को धन और हथियार कौन मुहैया करा रहा है?

Sanjay Sharma

पिछले कुछ महीनों से नक्सलियों के हमले अचानक बढ़ गए हैं। महाराष्टï्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया। हमले में 15 जवान शहीद हो गए। इससे पहले नक्सलियों ने यहां निर्माणाधीन सडक़ के पास 27 मशीनों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। वहीं नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ में भाजपा के एक विधायक और चार सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया था। इस हमले में सभी की मौत हो गई थी। सवाल यह है कि सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने वाले नक्सलियों का खात्मा क्यों नहीं हो पा रहा है? छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्टï्र तक नक्सली हमले अचानक क्यों बढ़ गए हैं? क्या ये हमले नक्सलियों और आतंकियों के गठजोड़ का नतीजा हैं? नक्सलियों को धन और हथियार कौन मुहैया करा रहा है? चुनाव के दौरान नक्सली हमले के पीछे की मंशा क्या है? क्या ये हमले खुफिया तंत्र की नाकामी हैं? क्या नक्सलियों से निपटने के लिए सरकार और सुरक्षाबलों को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है?
छत्तीसगढ़ और महाराष्टï्र में हुए नक्सली हमले चिंता का विषय हैं। हालात बेहद खतरनाक हो रहे हैं। गढ़चिरौली छत्तीसगढ़ से सटा है। ऐसे में इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह हमला दोनों राज्यों के नक्सलियों ने मिलकर किया हो। इसके अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी नक्सली अपनी पैठ बनाए हुए हैं। पिछले साल गढ़चिरौली में एक अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने 40 नक्सलियों को मार गिराया था, तभी से खुफिया इनपुट मिलने लगे थे कि नक्सली बदला लेने की फिराक में है। खुफिया सूचना के बावजूद नक्सली हमला करने में सफल रहे। नक्सलियों से निपटने के लिए अब सरकार को कड़ी और निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। इनके धन और हथियारों के स्रोत को बंद करना होगा। साथ ही उन लोगों को भी पकडऩा होगा जो इनके साथ मिलकर देश की सरकार और लोकतंत्र को चुनौती दे रहे हैं। नक्सली हिंसा के पीछे की साजिश का पर्दाफाश करना होगा। इसके अलावा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तीव्रगति से विकास करना होगा। नक्सली विकास विरोधी हैं। वे नहीं चाहते कि गांवों तक विकास पहुंचे। सच यह है कि नक्सली अब गिरोह में बदल चुके हैं और उन्होंने ग्रामीण जनता को बंधक बना रखा है। वे न केवल उनको धमकाते हैं बल्कि सुरक्षाकर्मियों के मूवमेंट की जानकारी के लिए भी इनका इस्तेमाल करते हैं। नक्सली और आतंकी गठजोड़ बनाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा हो गया तो स्थितियां और भी खतरनाक हो जाएगी। ऐसी स्थिति में नक्सलियों से निपटने के लिए सरकार को अपनी रणनीति तत्काल बदलनी होगी और निर्णायक व प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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