इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन को न बनने दें बच्चों के जीवन का हिस्सा

र पर छोटे बच्चे परेशान करते हैं तो सामान्यतौर पर पैरेंट्स उन्हें टीवी के सामने बैठा देते हैं या रोते हुए बच्चों को चुप कराने के लिए मोबाइल पकड़ा देते हैं। हालांकि ऐसा करना उनकी मानसिक सेहत के लिए सही नहीं है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ ने भी गाइडलाइन्स जारी की हैं जिनमें कहा गया है कि इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन को बच्चों के जीवन का हिस्सा न बनाएं। खासतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को इनसे दूर रखना चाहिए।

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