आतंकी मसूद पर भारत की कूटनीतिक जीत के निहितार्थ

सवाल यह है कि भारत की इस कूटनीतिक जीत के निहितार्थ क्या हैं? क्या चीन आतंकवाद के नाम पर अब पाकिस्तान का आंखमूंद कर सहयोग करने को तैयार नहीं है? क्या भारत, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका के दवाब के कारण चीन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े? क्या पाकिस्तान वैश्विक आतंकी मसूद के खिलाफ कड़़ी कार्रवाई करेगा?

Sanjay Sharma

आखिरकार संयुक्त राष्टï्र समिति ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया। अब जैश की सभी संपत्तियां जब्त कर ली जाएंगी और मसूद अजहर किसी भी देश में नहीं जा सकेगा। कोई भी व्यक्ति अब इस संगठन को आर्थिक मदद नहीं दे सकेगा। सवाल यह है कि भारत की इस कूटनीतिक जीत के निहितार्थ क्या हैं? क्या चीन आतंकवाद के नाम पर अब पाकिस्तान का आंखमूंद कर सहयोग करने को तैयार नहीं है? क्या भारत, ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका के दवाब के कारण चीन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े? क्या पाकिस्तान वैश्विक आतंकी मसूद के खिलाफ कड़़ी कार्रवाई करेगा? क्या इसका असर दुनिया में तेजी से फैल रहे आतंकवाद पर पड़ेगा? पाकिस्तान ने मसूद अजहर को इस बार बचाने की कोशिश क्यों नहीं की? क्या आतंकवाद पाकिस्तान के लिए भस्मासुर साबित होने लगा है?
आतंकवाद ने पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में ले लिया है। आईएस और जैश जैसे आतंकी संगठन दुनिया के तमाम देशों में आतंकी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। श्रीलंका में इन आतंकियों ने सिलसिलेवार धमाके किए। इन हमलों में तीन सौ से अधिक लोगों की मौत हुई। आतंकी हमलों से सबसे अधिक पीडि़त भारत है। यहां कई दशकों से आतंकी हमले हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान आतंकियों की घुसपैठ कराता रहा है। यहां उसे अलगाववादियों का समर्थन भी मिलता है। सेना के ऑल आउट अभियान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की कमर तोड़ दी है। भारत आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाए हुए है। पुलवामा हमले के बाद भारत ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए पूरा दमखम लगा दिया था। चीन के कारण भारत मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं करा पा रहा था लेकिन अमेरिका समेत विश्व के शक्तिशाली देशों के विरोध के कारण चीन नरम पड़ा और उसने इस बार वीटो पॉवर का इस्तेमाल नहीं किया। इसी के साथ मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया गया। दरअसल, मसूद पर चीन के नरम पडऩे के पीछे भारत का बड़ा बाजार है। चीन जानता है कि यदि वह मसूद के मामले में अडिय़ल रुख अपनाए रखेगा तो इसका सीधा असर उसके भारतीय बाजार पर पड़ेगा। भारत में उसके माल का बहिष्कार हो सकता है। इसके अलावा विश्व के तमाम देश भी मसूद के मामले में चीन का विरोध करने लगे थे। पाकिस्तान आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पाक जानता है कि जब तक वह आतंक के खिलाफ कड़ा रुख नहीं दिखाएगा उसे कहीं से आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। लिहाजा पाकिस्तान ने इस मामले में अपनी स्वीकृति दे दी। हालांकि पाक मसूद के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई करेगा इस पर संशय है। बावजूद यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है।

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