पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा के मायने

सवाल यह है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा और तोडफ़ोड़ की घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या विपक्ष के इस आरोप को स्वीकार कर लिया जाए कि बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल सरकार के इशारे पर यह सब किया जा रहा है? क्या चुनाव आयोग सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में नाकाम साबित हो रहा है?

Sanjay Sharma

लोक सभा चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा का सिलसिला जारी है। चौथे चरण के चुनाव के दौरान उपद्रवियों ने केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो की कार पर हमला ही नहीं किया बल्कि मतदान करने पहुंचे ग्रामीणों से मारपीट की। उपद्रवियों को खदेडऩे के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग करनी पड़ी। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण जेमुआ पोलिंग बूथ पर ग्रामीणों ने मतदान करने से इंकार कर दिया था। सवाल यह है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा और तोडफ़ोड़ की घटनाएं क्यों हो रही हैं? क्या विपक्ष के इस आरोप को स्वीकार कर लिया जाए कि बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल सरकार के इशारे पर यह सब किया जा रहा है? क्या चुनाव आयोग सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में नाकाम साबित हो रहा है? क्या हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद की जा सकती है? क्या शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल की ममता सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है? क्या ये घटनाएं किसी बड़े खतरे का संकेत हैं?
भारत में किसी भी चुनाव में हिंसा की छिटपुट घटनाएं होती रही हैं, लेकिन लोक सभा चुनाव में जिस तरह की घटनाएं पश्चिम बंगाल में घट रही हैं, वे चिंता का विषय हैं। यहां उपद्रवी न केवल तोडफ़ोड़ कर रहे हैं बल्कि लोगों को मतदान करने से भी रोक रहे हैं। ये उपद्रवी लोगों से मारपीट कर रहे हैं। इसके पहले यहां एक व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को सार्वजनिक रूप से लटका दिया गया था। यह स्थिति तब है जब यहां पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। अभी तक हुए सभी चार चरणों के चुनाव के दौरान यहां हिंसा की घटनाएं हुई हैं। इसके पहले पंचायतों के चुनाव के दौरान जमकर हिंसा हुई थी। उस समय हजारों बूथों पर लोग मतदान नहीं कर सके थे। ऐसे में विपक्षी दलों के इन आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता है कि यह सब सत्ताधारी पार्टी तृणमूल के इशारे पर किया जा रहा है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी पश्चिम बंगाल को लेकर बेहद गंभीर टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि यहां कुछ बहुत गंभीर घट रहा है। पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाओं ने चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। पंचायत चुनाव में हिंसा की घटनाओं को देखते हुए आयोग को यहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने चाहिए। जाहिर है पश्चिम बंगाल में जो कुछ हो रहा है, वह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए घातक है। चुनाव आयोग को इससे सख्ती से निपटना होगा अन्यथा यह बंगाल के साथ अन्य राज्यों में भी अपना असर दिखा सकती है। यह निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद खतरनाक है।

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