हंसना मना है

आजकल के बच्चे कम नंबर लाने पर जान देने के बारे में सोचने लगते हैं। एक हमारा टाइम था जब हमारे नंबर देखकर मास्टरसाहब की इच्छा जान देने की होती थी।

डॉक्टर: जब तुम तनाव में होते हो तो क्या करते हो। मरीज: जी मैं मंदिर चला जाता हूं। डॉक्टर: बहुत अच्छा। ध्यान लगाते हो न वहां। मरीज: जी नहीं, लोगों के जूते-चप्पल मिक्स कर देता हूं। फिर उन्हें तनाव में देखकर मेरा तनाव दूर हो जाता है।

संता: यार, दिल पर पत्थर रखकर आज मैंने 6 लड़कियों की फें्रड रिक्वेस्ट कैंसिल कर दीं। बंता: इतनी लड़कियों ने तुम्हें रिक्वेस्ट भेजी थी। संता: आई नहीं थीं, मैंने भेज रखी थीं।

आज के लिए कमाल की बात: जब तक फोन वायर से बंधा हुआ था, तब इंसान आजाद था और जब फोन आजाद हुआ है। इंसान फोन से बंध गया है।

पोता: दादाजी, आज भी आप दादी को स्वीटी, माइ लव क्यों कहते हैं। दादा: बेटे, 10 साल पहले उसका नाम भूल गया था अब तक दोबारा पूछने की हिम्मत नहीं हुई।

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