शहर में कूड़े के ढेर प्रदूषण और तंत्र

सवाल यह है कि हर साल शहर की साफ-सफाई के नाम पर आ रहा भारी-भरकम बजट कहां खर्च हो रहा है? आज तक कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी? कई हजार सफाई कर्मचारियों का अमला क्या कर रहा है? क्या अफसरों की लापरवाही के कारण स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं?

Sanjays Sharma

माम दावों के बावजूद राजधानी लखनऊ में स्वच्छता अभियान परवान नहीं चढ़ पा रहा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। निस्तारण नहीं होने के कारण कूड़ा सड़ रहा है। लिहाजा वातावरण के साथ भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है। इससे संक्रामक रोगों का खतरा बना रहता है। सवाल यह है कि हर साल शहर की साफ-सफाई के नाम पर आ रहा भारी-भरकम बजट कहां खर्च हो रहा है? आज तक कूड़ा निस्तारण की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी? कई हजार सफाई कर्मचारियों का अमला क्या कर रहा है? क्या अफसरों की लापरवाही के कारण स्थितियां लगातार बिगड़ती जा रही हैं? क्या लोगों की सेहत और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर नगर निगम गंभीर नहीं है? क्या किसी को भी जनता की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट दी जा सकती है? क्या ऐसे ही लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाया जा सकेगा?
साफ-सफाई के नाम पर राजधानी लखनऊ की हालत लगातार खराब होती जा रही है। यहां के तमाम बाजार व गलियों में कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। दुकानों के बाहर भी कचरा फैला रहता है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था भी चरमरा चुकी है। समय पर कूड़े का उठान नहीं किया जाता है। इसके निस्तारण की समुचित व्यवस्था तक नहीं की गई। कुछ पॉश इलाकों को छोडक़र सफाई कर्मी अधिकांश जगहों पर नहीं पहुंचते हैं। यही नहीं ये कूड़े को खुले में जलाकर निस्तारित करने से भी बाज नहीं आते हैं। इसके कारण वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है। डंपिंग ग्राउंड में कूड़े के ढेर सड़ रहे हैं। इससे न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है। कई स्थानों पर नालियां और सीवर चोक हैं और इनका गंदा पानी सडक़ों पर बह रहा है। इससे लोगों का आना जाना दूभर हो गया है। यह स्थिति तब है जब कूड़ा उठान के लिए हर साल ईंधन पर भारी भरकम धनराशि खर्च की जाती है। हकीकत यह है कि तमाम निरीक्षणों और निर्देशों के बावजूद स्थितियों में सुधार आता नहीं दिख रहा है। कुल मिलाकर स्वच्छता अभियान को पलीता लगाया जा रहा है। यदि सरकार शहर को साफ-सुथरा रखना चाहती है तो उसे न केवल साफ-सफाई व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी बल्कि अधिकारियों को जवाबदेह भी बनाना होगा। वहीं कूड़ा निस्तारण के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था भी करनी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो राजधानी को स्मार्ट बनाना सपना भर रह जाएगा।

 

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