कब सुधरेगी चिकित्सा सेवा?

सवाल यह है कि भारी-भरकम बजट के बावजूद अस्पतालों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? विशेषज्ञ चिकित्सकों, उपकरणों और दवाओं की कमी के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या चिकित्सा सेवाओं को भ्रष्टïाचार ने खोखला कर दिया है? मरीजों को बेहतर इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा है? सरकारी मेडिकल सुविधाओं का लाभ गरीबों को क्यों नहीं मिल रहा है?

sanjay Sharma

तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में चिकित्सा सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। राजधानी समेत कई जिलों के सरकारी अस्पतालों में गंभीर रोगियों के साथ रेफर-रेफर का खेल खेला जा रहा है। ऑपरेशन और जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अस्पतालों में दवाओं, उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा पड़ा है। सवाल यह है कि भारी-भरकम बजट के बावजूद अस्पतालों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? विशेषज्ञ चिकित्सकों, उपकरणों और दवाओं की कमी के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या चिकित्सा सेवाओं को भ्रष्टïाचार ने खोखला कर दिया है? मरीजों को बेहतर इलाज क्यों नहीं मिल पा रहा है? सरकारी मेडिकल सुविधाओं का लाभ गरीबों को क्यों नहीं मिल रहा है? प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शो पीस बनकर क्यों रह गए हैं? क्या चिकित्सा सेवाओं में आमूल परिवर्तन की जरूरत है? अस्पतालों के लचर तंत्र को लेकर सरकार गंभीर क्यों नहीं है?
प्रदेश की चिकित्सा सेवाएं चरमरा गई हैं। राजधानी लखनऊ की हालत भी अच्छी नहीं है। यहां के तमाम अस्पतालों में गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। न तो कर्मचारी और न चिकित्सक समय पर अस्पताल पहुंचते हैं। पंजीकरण कराने से लेकर चिकित्सक से मिलने तक मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। यहां मेडिकल स्टोर्स में पर्याप्त दवाएं नहीं है। लिहाजा मरीजों को आधी-अधूरी दवाएं देकर चलता कर दिया जाता है। जांच उपकरणों की बेहद कमी है। इसके कारण लोगों को परीक्षण कराने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऑपरेशन के लिए महीनों की वेटिंग मिलती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण गरीब मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि अधिकांश अस्पताल मरीजों को दूसरे अस्पताल रेफर कर देते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टीकाकरण सेंटर में तब्दील हो चुके है जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर चिकित्सक अनुपस्थित रहते हैं। इसके कारण राजधानी के अस्पतालों पर मरीजों का बोझ बढ़ जाता है। यह हाल तब है जब सरकार बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर चुकी है। जाहिर है अगर सरकार लोगों को गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना चाहती है तो उसे न केवल अस्पतालों की व्यवस्था में आमूल परिवर्तन करना होगा बल्कि चिकित्सकों, जांच उपकरणों और दवाओं की कमी को भी दूर करना होगा।

 

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