बेलगाम अपराधी और लचर पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि अपराधियों पर पुलिस शिकंजा कसने में नाकाम क्यों हो रही है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को खोखला कर दिया है? क्या लचर खुफिया तंत्र के कारण पुलिस अपराधियों का सुराग नहीं लगा पा रही है? कई वारदातों से आज तक पर्दा क्यों नहीं उठ सका है? क्या अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति विफल हो चुकी है? क्या पुलिस विभाग में आमूल परिवर्तन करने की जरूरत है?

Sanjay Sharma

लखनऊ में जमीन नहीं बेचने पर एक किसान की हत्या कर दी गई जबकि सर्राफ से बदमाशों ने लाखों रुपये लूट लिए। ये घटनाएं प्रदेश में बढ़ते अपराधों की बानगी भर है। हाल यह है कि तमाम दावों के बावजूद पुलिस अपराधियों पर शिकंजा कसने में नाकाम है। ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बावजूद अपराधियों में खाकी का खौफ नहीं पैदा हो सका है और वे वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। सवाल यह है कि अपराधियों पर पुलिस शिकंजा कसने में नाकाम क्यों हो रही है? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरे तंत्र को खोखला कर दिया है? क्या लचर खुफिया तंत्र के कारण पुलिस अपराधियों का सुराग नहीं लगा पा रही है? कई वारदातों से आज तक पर्दा क्यों नहीं उठ सका है? क्या अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति विफल हो चुकी है? क्या पुलिस विभाग में आमूल परिवर्तन करने की जरूरत है? क्या अपराधी व पुलिस की गठजोड़ के कारण स्थितियां बिगड़ रही है?
राजधानी समेत पूरे प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन हत्या, लूट, रेप, अपहरण जैसी घटनाएं घट रही हैं। साइबर क्राइम की वारदातें भी बढ़ रही हैं। साइबर जालसाज लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा ले रहे हैं। दरअसल, अपराधों के बढऩे के पीछे खुद प्रदेश पुलिस का लचर रवैया और विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार बहुत कुछ जिम्मेदार है। पीडि़तों के प्रति पुलिस का व्यवहार बेहद खराब है। कई बार पीडि़त को थानों से बिना रिपोर्ट लिखे भगा दिया जाता है। कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की है। आरोपियों से पैसा लेकर केस को कमजोर करने की शिकायतें भी मिलती रहती हैं। ऐसे में पीडि़त को न्याय नहीं मिल पाता है। यही नहीं खुद पुलिसकर्मी हत्या जैसी जघन्य वारदात को अंजाम देने से नहीं हिचकते हैं। पिछले वर्ष राजधानी में एक आम नागरिक को एक पुलिसकर्मी ने गोली मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई। कुछ ऐसे भी मामले सामने आ चुके हैं जब पुलिसकर्मियों और बदमाशों ने मिलकर अपराधों को अंजाम दिया। कुल मिलाकर पुलिस के रवैए के कारण स्थितियां नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। स्थानीय खुफिया तंत्र की कमजोरी के कारण अपराधियों को पकडऩा मुश्किल हो चुका है। ऐसे में तमाम अपराधों की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। जाहिर है यदि सरकार अपराधों को नियंत्रित करना चाहती है तो उसे न केवल पूरे पुलिस विभाग में आमूल परिवर्तन करना होगा बल्कि भ्रष्टïाचार में लिप्त कर्मियों को चिन्हित कर बाहर का रास्ता दिखाना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो अपराधों पर कभी नियंत्रण नहीं लग पाएगा। साथ ही इसका असर प्रदेश के विकास और यहां होने वाले निवेश पर भी पड़ेगा।

 

Loading...
Pin It