जाति और धर्म के नाम पर वोट मांगने वाले नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कार्रवाई न करने पर चुनाव आयोग को फटकारा

  • चुनाव आयोग के सीमित शक्तियों के हवाले पर भडक़ा, कहा कल करेगा अधिकारों की जांच पर सुनवाई
  • एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जताई नाराजगी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। धार्मिक और जाति के आधार पर वोट मांगने वाले नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, ऐसे नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? इस मामले में कोर्ट ने आयोग की सीमित शक्तियों को लेकर भी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस के नेतृत्व वाली बेंच ने चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों से मंगलवार को कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन दलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, जिनके नेता धर्म व जाति के नाम पर वोट मांगते हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा, मायावती ने अपने धार्मिक आधार पर वोटिंग करने वाले बयान के नोटिस का जवाब नहीं दिया है। आपने क्या किया? आप ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं कर सकते। आपने ऐसे बयानों पर कुछ नहीं किया। आपको ऐसे बयानों पर जरूर कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग ने कहा, हमारी शक्तियां सीमित हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने आयोग से कल सुबह जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि क्या चुनाव आयोग अपनी ताकत जानता है। वह चुनावी अभियान में हेट स्पीच व सांप्रदायिक बयानबाजी करने पर चुनाव आयोग के अधिकारों की जांच करेगा। कोर्ट ने चुनाव आयोग के प्रतिनिधि को कल सुबह 10.30 पेश होने के लिए कहा है। आचार संहिता तोडऩे को लेकर चुनाव आयोग ने कोर्ट में कहा है कि ऐसे मामलों में वह केवल नोटिस और एडवाइजरी जारी कर रहा है। आयोग न तो किसी को अयोग्य करार दे सकता है और न ही किसी पार्टी को डि रजिस्ट्रार कर सकता है? इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि वे इस मामले में सुनवाई करेंगे। सुनवाई के वक्त आयोग के किसी प्रतिनिधि को मौजूद रहने के लिए भी कहा।

क्या है मामला

नई दिल्ली। (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क) देवबंद में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की एक रैली के दौरान मायावती ने कहा था कि मुस्लिम मतदाताओं को भावनाओं में बहकर अपने वोट को बंटने नहीं देना है। इस बयान को लेकर कई पार्टियों ने नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए मायावती को नोटिस भेजा था। वहीं मायावती के इस बयान के जवाब में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी बजरंग बली और अली का जिक्र कर मायावती पर निशाना साधा था। योगी के इस बयान की भी काफी आलोचना हुई थी। इस मामले में आयोग ने नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। आयोग ने मायावती को चुनाव कोड के उल्लंघन का दोषी मानने के साथ ही सेक्शन 123 (3) के तहत जनप्रतिनिधि कानून 1951 के उल्लंघन का भी दोषी माना है। इस कानून के तहत उम्मीदवार धार्मिक आधार पर मतदान की मांग नहीं कर सकते न मतदाताओं को धर्म के आधार पर मतदान के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

‘चौकीदार चोर है’ पर फंसे राहुल गांधी, शीर्ष अदालत ने मांगा जवाब

  • कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ अगली सुनवाई 23 अप्रैल को
  • भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने दायर की थी याचिका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राफेल मामले पर पीएम मोदी पर हमलावर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ‘चौकीदार चोर है’ के बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ दायर अवमानना यािचका पर राहुल गांधी से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी, तब तक राहुल को अपना जवाब देना होगा। भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कोर्ट में राहुल के खिलाफ याचिका दायर की थी।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमने ये बयान कभी नहीं दिया है, हम इस मसले पर सफाई मांगेंगे। हम ये साफ करना चाहते हैं कि जो भी विचार कोर्ट को लेकर मीडिया में कहे गए हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। हमें उम्मीद है कि राहुल गांधी इस बयान पर अपनी सफाई देंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील से जुड़े फैसले पर पुनर्विचार याचिका को मंजूर किया था, जिसके बाद राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी कि अब सुप्रीम कोर्ट भी कह रहा है कि चौकीदार चोर है। इसी पर भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।

जयाप्रदा पर अश्लील टिप्पणी कर चौतरफा घिरे आजम खां, केस दर्ज

  • महिला आयोग ने भेजा नोटिस भाजपा और कांग्रेस ने की निंदा
  • मैं ऐसे बयानों से डरकर रामपुर नहीं छोडऩे वाली: जयाप्रदा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ अश्लील टिप्पणीकर सपा नेता आजम खां चौतरफा घिर गए हैं। आजम के खिलाफ इस बयान को लेकर केस दर्ज किया गया है। वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कांग्रेस ने भी आजम के खिलाफ चुनाव आयोग व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से कार्रवाई की मांग की है। सुषमा स्वराज ने आजम के बयान की तुलना द्रौपदी के चीरहरण से करते हुए मुलायम सिंह यादव को भीष्म बनकर मौन न रहने की नसीहत दी है।
जयाप्रदा का नाम लिए बगैर आजम ने एक जनसभा में कहा था कि क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का खून पिया, जिसे हम रामपुर में लेकर आए, उसने हमारे ऊपर क्या-क्या इल्जाम नहीं लगाए। क्या आप उसे वोट देंगे? आपने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवेअर खाकी रंग का है। जयाप्रदा ने कहा वे इन टिप्पणियों से डरकर रामपुर नहीं छोड़ेंगी।

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