सफाई व्यवस्था पर नगर निगम के दावे फुस्स कूड़ा कलेक्शन में बरती जा रही लापरवाही

  • कई दिनों तक घरों में पड़ा रहता है कूड़ा, अधिकारियों के आदेश भी बेअसर
  • दूर की कौड़ी साबित हो रहा गीले कचरे से होम कंपोस्टिंग का सपना
  • पिछले साल एक अप्रैल से शुरू की गई थी कूड़ा कलेक्शन की नई व्यवस्था

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के शत प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन ही नहीं होता है। जिन घरों से कूड़ा कलेक्शन होता भी है उनके घरों में अक्सर कूड़ा कलेक्शन के लिए कोई नहीं पहुचता। आलम यह है कि लोग कई दिनों तक कूड़ा घरों में रखने को मजबूर हो जाते है। बाद में लोगों को सडक़ या कहीं अन्य स्थान पर कूड़ा फेंकना पड़ता है। तमाम सख्ती और अफसरों की नाराजगी के बावजूद व्यवस्था में सुधार होता नहीं दिख रहा है। यही कारण है कि लखनऊ स्वच्छता में अन्य शहरों के मुकाबले फिसड्डी होता जा रहा है।
नगर निगम के अफसरों की ओर से किए जा रहे दावे के अनुसार महज 65 फीसदी घरों से ही कूड़ा कलेक्ट किया जाता है। ऐसे में गीले कचरे से होम कंपोस्टिंग दूर का सपना साबित हो रहा है। निगम प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि जल्द ही शहर में भी गीले कचरे से होम कंपोस्टिंग संबंधी कदम उठाए जाएंगे। यह भी आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही योजना शुरू होगी, लेकिन हकीकत यह है कि महीनों बीतने के बावजूद ये योजना कागजों में है। शहर के पुराने इलाकों में अभी यह व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सकी है। इसके साथ ही शहर के बाहरी इलाके भी इस सुविधा से जुड़े नहीं हैं। यहां के लोगों ने कई बार निगम प्रशासन से इस संबंध में गुहार भी लगाई लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। निगम प्रशासन की ओर से एक अप्रैल 2018 से घरों से कूड़ा कलेक्शन की नई व्यवस्था लागू की गई, जिसमें प्रत्येक जोन के 5 वार्ड चिन्हित किए गए। पहले इन वार्डों में शत प्रतिशत घरों से कूड़ा उठान की व्यवस्था को मजबूत करना था। इसके बाद दूसरे चरण में फिर पांच से सात वार्ड लिए जाने थे। नई व्यवस्था तो लागू हुई, लेकिन चयनित पांच वार्डों में से शत प्रतिशत कूड़ा कलेक्शन नहीं हो सका। जिसके बाद पार्षदों ने निगम प्रशासन से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। शहर में कूड़ा निस्तारण ठीक से नहीं होने पर मेयर संयुक्ता भाटिया ने हाल ही में ईको ग्रीन अफसरों की क्लास लगाई। मेयर ने ईकोग्रीन के प्रबंधक अभिषेक से उनके द्वारा कवर किए जा रहे मोहल्ले की सूची तलब की है। इस दौरान शहर में शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाडिय़ां और कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में लखनऊ के प्रत्येक मोहल्ले से डोर-टू-डोर कूड़ा उठना चाहिए, जिससे लखनऊ की जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए जोनवार शत-प्रतिशत कूड़ा उठाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है जब ईकोग्रीन को फटकार लगी हो बल्कि दर्जनों बार अफसरों ने इकोग्रीन के अफसरों को फटकार लगाई लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

कई बार ठप हुआ काम

 18 सितंबर 2018 को भुगतान न होने से नाराज ईकोग्रीन के वेंडरों ने शिवरी प्लांट के गेट पर जेसीबी और पोकलैंड खड़े कर गाडिय़ों का आना-जाना बंद कर दिया था।
8 सितंबर 2018 को वेतन न मिलने पर ईकोग्रीन के कर्मचारियों ने गोमतीनगर स्थित कम्पनी के गेट पर ताला लगा दिया था।
14 अगस्त 2018 को बड़ी गाडिय़ों में डीजल न होने के कारण कई इलाकों में पड़ावघरों से दोपहर बाद तक कूड़ा नहीं उठाया गया।

रिपोर्ट भेजने का भी असर नहीं

कई बार चेतावनी के बाद भी कूड़ा उठान में कोई सुधार न होने पर नगर आयुक्त ने पिछले साल ईकोग्रीन के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी थी। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में ईकोग्रीन के काम को असंतोषपूर्ण बताते हुए कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। यह भी कहा गया था कि कंपनी के कर्मचारी और गाडिय़ां शहर में बनाए गए तीन ट्रांसफर स्टेशनों से भी शिवरी तक कूड़ा उठाकर नहीं ले जा पा रहे हैं। ऐसे में नगर निगम की गाडिय़ों से कूड़ा उठवाने पड़ रहे हैं।

यूजर चार्ज

2 करोड़ हर माह अनुमानित यूजर चार्ज वसूली
1 करोड़ 15 लाख इस माह वसूलने का लक्ष्य
50 से 100 रुपये करीब प्रति कंज्यूमर यूजर चार्ज
ईकोग्रीन कंपनी का दावा
65 फीसदी घरों से उठ रहा कूड़ा
35 फीसदी घरों से ही नहीं उठ रहा कूड़ा

ईकोग्रीन के संसाधन

1800 के करीब कर्मचारी
300 कुल ई-रिक्शा
478 हाथ रिक्शा
48 जीप
152 पीआईजिओ
90 मिनी टिपर
22 ट्रैक्टर ट्रॉली

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