अफसर लाचार और मातहत बेलगाम फिर कैसे लगे अपराधियों पर लगाम

  • वर्दी में गुंडे व डकैत, नौ माह के भीतर 25 पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुए मुकदमे
  • कई गए सलाखों के पीछे और कई खा रहे लाइन की हवा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिन पुलिस वालों के कंधों पर जनता की सुरक्षा का जिम्मा हो, अगर वही जरायम की दुनिया में कदम रखे तो आखिर कैसे थमेगा अपराध। इन पर लगाम कसने के लिए जिले के कप्तान ही नहीं पुलिस मुखिया ने भी कई बार हिदायत दी, लेकिन वे अपनी हरकतों सेे बाज नहीं आ रहे हैं। इससे यही लग रहा है कि मातहत बेलगाम और हाकिम लाचार हो गए हैं।
पिछले नवम्बर 2018 से लेकर मार्च 2019 के करीब 25 पुलिसर्मी निलंबित किए गए। इनमें से आधा दर्जन के करीब बर्खास्त हो चुके हैं। ये आंकड़े उस लखनऊ पुलिस के हैं, जिस पर अपराध रोकने की जिम्मेदारी है। वसूली, चोरी, डकैती से लेकर अपहरण और हत्या तक शायद ही कोई जुर्म हो जिसके दाग खाकी पर नहीं पड़े हों। कभी अपने इकबाल के लिए मशहूर लखनऊ पुलिस का यह बदरंग चेहरा ही अब इसकी असल पहचान बनता जा रहा है। हाल ही में हुई घटनाओं से साबित होता है कि पुलिसकर्मियों को अब किसी का खौफ नहीं रहा। दरअसल, राजधानी पुलिस और अपराध का नाता नया नहीं बल्कि बहुत पुराना है। दरोगा धीरेन्द्र शुक्ला, आरक्षी अनिल सिंह व धीरेन्द्र पर अपराधियों से मिलकर बेटे की हत्या का इंसाफ पाने के लिए दौड़ रहे पिता श्रवण साहू को मारने का आरोप भी लग चुका है और पुख्ता सुबूत मिलने के बाद तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था। वहीं, 2018 में दीपावली से पहले कारोबार के सिलसिले में आगरा से परिवार के साथ लखनऊ आए सर्राफा व्यवसायी विशाल जैन को मडियांव थाने में तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, दरोगा दलवीर सिंह और आफताब आलम ने चेकिंग के बहाने रोका और 3.5 लाख रुपये लूट लिए। इसकी भनक लगते ही एसएसपी कलानिधि नैथानी ने जांच पड़ताल कराई। मामला सही निकला। इस पर उनको तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया था। इसके अलावा मार्च माह के शुरूआती दौर में गोसाईगंज क्षेत्र में काला धन पकडऩे के नाम पर लाखों की डकैती डालने के आरोप में दरोगा पवन कुमार मिश्रा, आशीष तिवारी और आरक्षी प्रदीप कुमार सिंह भदौरिया पर मुकदमा दर्ज कर सलाखों के पीछे भेजा। यहीं से बात खत्म नहीं हुई अब हजरतगंज कोतवाली पर गौर करें तो मालखाना प्रभारी हेड कांस्टेबिल अशोक कुमार सिंह पर अमानत में ख्यानत की रिपोर्ट दर्ज हुई और पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा।

युवक का किया कत्ल

शहीद पथ पर चेकिंग के नाम पर गोमतीनगर थाने में तैनात सिपाही प्रशांत चौधरी साथी के साथ एक युवक के कत्ल के जुर्म में भी फंस चुका है। यह तो बानगी भर है, इससे पहले भी कई दागी पुलिसकर्मी वर्दी पर दाग लगा चुके हैं।

पहले पीटा फिर लूटा

कानुपर निवासी लुकमान का कहना है कि वह 3 मार्च को कानपुर के दलेलपुरवा निवासी सलाउद्दीन और प्रतापगढ़ निवासी शहनवाज को अमौसी एयरपोर्ट छोडऩे जा रहा था कि रास्ते में ओवरटेक कर स्कार्पियो से चार लोग उतरे और खुद को क्राइम ब्रंाच व एसटीएफ गाजियाबाद का बताते हुए घेर लिया। लुकमान और उसके साथियों ने फ्लाइट छूट जाने का हवाला दिया, लेकिन लुटेरों के रूप में खड़े दागी पुलिसकर्मियों ने उन्हें गाड़ी में लादकर बंथरा थाने ले आए। यहां पहले उनको पीटा फिर लूटपाट की।

 

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