जाम की समस्या से जूझ रही राजधानी, यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों ने बढ़ाई मुश्किल

  • अतिक्रमण और अवैध पार्किंग ने लोगों का सडक़ पर चलना किया दूभर
  • हालात को नियंत्रित कर पाने में ट्रैफिक पुलिस हो रही है नाकाम
  • सडक़ सुरक्षा अभियान का भी नहीं पड़ रहा असर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। तमाम कवायदों और दावों के बावजूद राजधानी में लगने वाले जाम से लोगों को छुटकारा नहीं मिल रहा है। अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और टै्रफिक नियमों का उल्लंघन करने के कारण स्थितियां लगातार बदतर होती जा रही हैं। जाम के कारण लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में घंटों लग जाते हैं। वहीं, जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
राजधानी में जैसे-जैसे तपमान बढ़ रहा है। वैसे-वैसे ट्रैफिक में फंसने वालों की परेशानी में इजाफा होता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस परेशानी में और भी इजाफा होगा। लखनऊ की सडक़ों पर अतिक्रमण, जहां-तहां अवैध वाहन पार्किंग और ट्रैफिक नियम तोडऩे के कारण जाम की स्थिति गंभीर होती जा रही है। शहर का कोई भी ऐसा कोना नहीं है, जहां लोग जाम में न फंसते हों। चाहे आप कानपुर से होते हुए लखनऊ में प्रवेश कर रहे हों या सीतापुर के रास्ते से शहर में एंट्री कर रहे हों, जाम से सामना होगा ही। सुल्तानपुर रोड, फैजाबाद रोड, हरदोई रोड सभी ऐसी जगहों पर रोजाना घंटों जाम लगता है। ये वे जगहें हैं, जहां से लोग शहर में प्रवेश करते हैं। शहर के अंदर आते-आते हालात और बदतर हो जाते हैं। जिस जगह तक आप आधे घंटे में पहुंच सकते हैं, वहां जाम के कारण पहुंचने में दो घंटे तक लग जाते हैं। जाम की समस्या सुबह से लेकर शाम तक जस की तस बनी रहती है।
राजधानी के चिनहट मटियारी, भिठौली, रिंग रोड, टेढ़ी पुलिया, इंदिरा नगर सेक्टर 25, खुर्रम नगर, मडिय़ांव का भिठौली चौराहा, कानपुर रोड, आलमबाग मेट्रो रूट, चारबाग, पुराने लखनऊ का रूट, डालीगंज पुल स्थित कन्वेंशन सेंटर, कैसरबाग चौराहा, डंडहिया चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, चौक, नक्खास ऐसी जगह हैं, जहां पर जाम में लोग अगर फंसे तो वहां से निकलने में घंटों बीत जाएंगे। राज्य सरकार भले ही लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कर रही हो, लेकिन इस शहर की यातायात की बागडोर जिन ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के भरोसे है उनकी नियम तोडऩे वाले भी नहीं सुनते। आलम यह है कि लोग ट्रैफिक के नियम तोड़ते हुए गाड़ी आगे बढ़ा देते है और पुलिस डंडा पटकती रह जाती है। वहीं सडक़ सुरक्षा अभियान का असर भी नहीं दिख रहा है। टै्रफिक पुलिस राजधानी की यातायात व्यवस्था को कंट्रोल करने में नाकाम साबित हो रही है।

टै्रफिक पुलिस की कमी

यातायात विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 2001 से पहले तक 882 पुलिसकर्मी शहर के यातायात को संभाल रहे थे। इसके बाद 2015 आते-आते यह संख्या 459 पर पहुंच गई। ऐसे में चंद यातायात पुलिसकर्मी शहर की लाइफ लाइन को किस तरह नियंत्रित करें, यह बड़ी समस्या बन गई है जबकि मौजूदा समय में ट्रैफिक पुलिस के सहयोग में होमगार्ड भी है और सिविल पुलिस भी ट्रैफिक सुधारने में सहयोग कर रही है।

गलत तरीके से ओवरटेक ने बिगाड़ी हालत

जाम की एक बड़ी वजह ओवरटेक भी है। जब कोई आपकी गाड़ी से पहले निकलने के लिए गलत ओवरटेक करता है इससे कई बार गाडिय़ां इस तरह फंस जाती हैं कि जाम की कतार लंबी हो जाती है। इतना ही नहीं कई बार लोग अपना रौब दिखाने के लिए सडक़ के बीच में गाड़ी खड़ी करके चल देते हैं। इससे भी अक्सर जगह-जगह जाम लगता है।

यहां रहता जाम का झाम

मडिय़ांव
चौक
खुर्रमनगर चौराहा
आलमबाग
फैजाबाद रोड
अमीनाबाद
कैसरबाग
रिंग रोड टेढ़ी पुलिया
डालीगंज
चिनहट मटियारी
भिठौली चौराहा

Loading...
Pin It