शहर में फैली गंदगी के लिए नगर निगम दोषी: राजर्षि शुक्ला

  • नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी परिवादी को देंगे एक साल का वेतन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उपभोक्ता फोरम लखनऊ के न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला ने शहर में फैली गंदगी के लिए नगर निगम को दोषी ठहराया है। राजर्षि शुक्ला ने पंद्रह दिन के अंदर शहर को गंदगी मुक्त करने का आदेश नगर निगम को दिया था। साथ ही नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी को दंड स्वरूप एक साल का वेतन परिवादी डॉ. आनंद अखिला को देने का ऐतिहासिक फैसला दिया है।
राजधानी में गंदगी, अतिक्रमण, खुले मेनहोल, मच्छरों के प्रकोप और छुट्टा जानवरों के जमावड़े की समस्या लगातार बढ़ रही है। इस समस्या को लेकर शहर के वैज्ञानिक डॉ. आनंद अखिला ने मई 2017 में जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया था। जिसकी वाद संख्या 196/17 है। इस संबंध में उन्होंने फोरम में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे नगर निगम को नियमित रुप से हाउस टैक्स और वाटर टैक्स देते हैं। उनका अधिकार बनता है कि नगर निगम उन्हें एक उपयुक्त और स्वच्छ वातावरण मुहैया कराये। डॉ. आनंद ने सारे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए, जिसके जवाब में नगर निगम की तरफ से पेश प्रत्युत्तरों को कोर्ट ने नकार दिया। न्यायिक अधिकारी राजर्षि शुक्ला और अरविंद कुमार की बेंच ने आदेश में कहा कि लगातार बीमारियों, गंदगी एवं आवारा कुत्तों के काटने की समस्या बढ़ती जा रही है। कुत्तों के काटने से कई लोगों की मौत की खबरें भी आती रहती हैं। छुट्टा जानवरों के सडक़ पर घूमने से दुर्घटनाएं होती रहती हैं। मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, लेकिन नगर निगम अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से नहीं कर रहा है।
शहर में वीआईपी क्षेत्रों के अलावा कहीं फॉगिंग नहीं होती है। इसलिए बेंच ने राष्ट्रीय आयोग के फैसले का हवाला देकर नगर आयुक्त को जमकर लताड़ लगाई। इसके साथ ही नगर निगम को दोषी माना। बेंच ने कहा कि यदि 15 दिन में सफाई व्यवस्था और छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए पर्याप्त काम नहीं किया गया तो परिवादी डॉ. आनंद अखिला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 27 के तहत कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिकृत होंगे।

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