चुनाव, कालाधन और आयोग

सवाल यह है कि क्या इस कालेधन का इस्तेमाल लोक सभा चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए किया जाने वाला था? क्या सियासी दल चुनाव जीतने के लिए धन-बल का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके लिए बाकायदा कलेक्शन किया जाता है?

Sanjay Sharma

चुनाव से ठीक पहले आयकर विभाग ने मध्य प्रदेश, गोवा और दिल्ली में छापेमारी की। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबियों पर आयकर की छापेमारी में अब तक 15 करोड़ की नकदी बरामद की गई है। इसके अलावा कारोबार, राजनीति और सार्वजनिक सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों के कई व्यक्तियों के जरिए 281 करोड़ की बेहिसाबी नकदी जुटाने के रैकेट का भी पता चला है। यह भी पता चला है कि बोगस बिलों के आधार पर सैकड़ों करोड़ का काला धन इधर से उधर किया गया। सवाल यह है कि क्या इस कालेधन का इस्तेमाल लोक सभा चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए किया जाने वाला था? क्या सियासी दल चुनाव जीतने के लिए धन-बल का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके लिए बाकायदा कलेक्शन किया जाता है? क्या भ्रष्टïाचार से सत्ता हासिल करने वाले नेता को सच्चा जनप्रतिनिधि कहा जा सकता है? क्या ऐसे जनप्रतिनिधि सरकार में शामिल होने के बाद भ्रष्टïाचार को बढ़ावा नहीं देंगे? क्या चुनावों में कालेधन के इस्तेमाल पर रोक लगाना नामुमकिन है? क्या आयोग को इस मामले में सख्ती बरतने की जरूरत नहीं है? क्या धन और बाहुबल से सत्ता हासिल करना लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने के समान नहीं है? क्या दलों को इस बारे में सोचने की जरूरत नहीं है?
पिछले पांच दशकों से चुनावों में कालेधन का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। उम्मीदवार निर्धारित आय सीमा के तहत खर्च का ब्यौरा देकर चुनाव आयोग की आंख में धूल झोंक रहे हैं। हकीकत यह है कि हर उम्मीदवार निर्धारित आय सीमा से कई गुना अधिक खर्च प्रचार, रैलियों और सभाओं पर करते हैं। हवाला के जरिए भी मोटी रकम सियासी दलों तक पहुंचती है। चुनाव के लिए लोगों से धन एकत्र करने के लिए पूरा सिंडिकेट काम करता है। इसमें दो राय नहीं है कि इस कालेधन का प्रयोग सियासी दल वोटरों को लुभाने या खरीदने के लिए करते हैं। शराब और पैसे बांटे जाते हैं। चुनाव के दौरान कैश के इस्तेमाल, अवैध धन और स्रोतों के बारे में चुनाव आयोग जानकारी देता है और कार्रवाई के बारे में जरूरी निर्देश भी देता है। बावजूद इसके आज तक न तो चुनाव में होने वाले कालेधन पर रोक लगाई जा सकी है न इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों पर कार्रवाई हो सकी है। चुनाव आयोग को चाहिए कि वह पारदर्शी कार्ययोजना बनाए जिससे कालेधन के इस्तेमाल को रोका जा सके। अन्यथा एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था को हकीकत में नहीं बदला जा सकेगा।

 

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